मुंबई।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के प्रस्तावित पुरंदर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए चुनी गई ‘साइट 1A’ को चुनौती देने वाली किसानों की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि किसी बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के लिए जमीन की जरूरत, स्थान और परियोजना की व्यवहार्यता तय करना विशेषज्ञों और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की खंडपीठ तीन किसानों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। किसानों ने ‘साइट 1A’ पर एयरपोर्ट बनाने के फैसले को चुनौती देते हुए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकने की मांग की थी। किसानों की दलील थी कि प्रस्तावित अधिग्रहण में बड़ी मात्रा में सिंचित और बहुफसली कृषि भूमि शामिल है। उनका कहना था कि वे और अन्य प्रभावित किसान इन जमीनों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि एयरपोर्ट के लिए पहले ‘साइट 1A’ के बजाय ‘साइट 5A’ पर विचार किया गया था और तकनीकी व्यवहार्यता का हवाला देकर स्थान बदला गया था, लेकिन बाद में बिना परिस्थितियों में बदलाव के परियोजना को फिर ‘साइट 1A’ पर ले आया गया। अदालत ने हालांकि कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो कि ‘साइट 5A’ को कभी अंतिम रूप से चुना गया था। कोर्ट के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर विचार उस समय किया गया था जब संबंधित अधिकारी परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन कर रहे थे।
‘साइट चयन में अदालत विशेषज्ञों की जगह नहीं ले सकती’
हाईकोर्ट ने कहा कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त स्थान तय करना कई तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर निर्भर करता है। इसमें परियोजना का संरेखण, स्थान, सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक भूमि जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन सभी पहलुओं की जानकारी और तकनीकी विशेषज्ञता सरकार और संबंधित कार्यकारी अधिकारियों के पास होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिट कोर्ट तकनीकी विशेषज्ञों या सरकारी अधिकारियों के निर्णय की जगह अपना आकलन नहीं रख सकती, जब तक निर्णय में दुर्भावना, कार्यपालिका की शक्ति का गलत इस्तेमाल, अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन या पर्यावरणीय मानकों का पालन न करने जैसी गंभीर खामी ठोस सामग्री से साबित न हो।
किसानों की याचिका में जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही में किसी वैधानिक प्रावधान के उल्लंघन को स्थापित नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता मुख्य रूप से अपनी कृषि भूमि को अधिग्रहण से बचाने के लिए एयरपोर्ट के स्थान का विरोध कर रहे हैं। अदालत ने माना कि नागरिक एयरपोर्ट का निर्माण व्यापक सार्वजनिक हित से जुड़ा है और उसके लिए स्थान का चयन विशेषज्ञों के क्षेत्राधिकार तथा सरकार के नीतिगत निर्णय का हिस्सा है। केवल इस आधार पर कि प्रभावित जमीन मालिकों के अनुसार कोई दूसरा स्थान कम नुकसान वाला हो सकता है, अदालत सरकारी निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इन टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका को मेरिट से रहित मानते हुए खारिज कर दिया।
केस: Pandit Shivaji Kumbharkar बनाम State of Maharashtra, Writ Petition No. 14127 of 2025.