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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मजिस्ट्रेट से बरी होने पर पीड़ित की अपील हाईकोर्ट नहीं, सेशन कोर्ट में होगी

मजिस्ट्रेट की अदालत से आरोपी के बरी होने के खिलाफ पीड़ित को अब हाईकोर्ट का रुख नहीं करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि BNSS की धारा 413 के तहत ऐसी अपील सेशन कोर्ट में दाखिल होगी, क्योंकि मजिस्ट्रेट के दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ भी अपील का अधिकार सेशन कोर्ट को ही है।

Sonali26 सित. 2026, 03:08 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मजिस्ट्रेट से बरी होने पर पीड़ित की अपील हाईकोर्ट नहीं, सेशन कोर्ट में होगी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ पीड़ित की अपील हाईकोर्ट में नहीं, बल्कि सेशन कोर्ट में दाखिल होगी। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 413 के प्रावधान के तहत पीड़ित को मिली अपील का अधिकार उसी अदालत के समक्ष इस्तेमाल किया जाएगा, जहां मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ सामान्य रूप से अपील की जाती है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए दिया, जिसमें पीड़ित की ओर से मजिस्ट्रेट के बरी करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील को सुनने से इनकार किया गया था। हाईकोर्ट ने पीड़ित को सेशन कोर्ट में अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता दी थी।


मामला डॉक्टर और नर्स पर लापरवाही के आरोप से जुड़ा

मामले में याचिकाकर्ता के बेटे को अवसाद संबंधी बीमारी थी और अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उसकी आत्महत्या से मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और नर्स की लापरवाही के कारण उसके बेटे की मौत हुई। इस मामले में IPC की धारा 304A और धारा 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी डॉक्टर और नर्स को बरी कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। हाईकोर्ट ने माना कि ऐसी अपील उसके समक्ष विचारणीय नहीं है और पीड़ित को सेशन कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी। इसके खिलाफ पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।


धारा 413 BNSS में पीड़ित को मिला है अपील का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने BNSS की धारा 413, धारा 415(3) और धारा 419 के बीच संबंध की जांच की। कोर्ट ने कहा कि धारा 419 सामान्य तौर पर बरी किए जाने के खिलाफ अपील से संबंधित है, लेकिन पीड़ित की अपील के मामले में धारा 413 का प्रावधान विशेष रूप से लागू होता है। धारा 413 के प्रावधान के अनुसार पीड़ित को आरोपी के बरी होने, कम गंभीर अपराध में दोषी ठहराए जाने या अपर्याप्त मुआवजा दिए जाने के खिलाफ अपील का अधिकार है। ऐसी अपील उस अदालत में दाखिल की जानी है, जहां संबंधित अदालत के दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ सामान्य रूप से अपील की जाती है।


मजिस्ट्रेट के दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि BNSS की धारा 415(3) के तहत प्रथम या द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपी की अपील सेशन कोर्ट में होती है। इसलिए मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ पीड़ित की अपील भी सेशन कोर्ट में ही दाखिल की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अपराध की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती। यानी यदि बरी करने का आदेश मजिस्ट्रेट ने पारित किया है, तो पीड़ित की अपील का मंच सेशन कोर्ट ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा पारित बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील उसी अदालत में होगी, जहां मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दोषसिद्धि आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है, यानी सेशन कोर्ट।


एक महीने में अपील दाखिल करने की छूट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पीड़ित को सेशन कोर्ट में अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि पीड़ित इस आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर अपील दाखिल करता है, तो उसे स्वीकार कर मेरिट के आधार पर सुना जाए। इस दौरान हाईकोर्ट में सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही के कारण हुई देरी को आधार बनाकर अपील को विलंबित नहीं माना जाएगा।