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नोएडा बस अग्निकांड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 9 यात्रियों की मौत के बाद स्लीपर बसों के परमिट और सुरक्षा जांच का मांगा पूरा रिकॉर्ड

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी जांच और पिछले दो वर्षों में किए गए निरीक्षण का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।

Sonali26 सित. 2026, 03:08 PM IST
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नोएडा बस अग्निकांड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 9 यात्रियों की मौत के बाद स्लीपर बसों के परमिट और सुरक्षा जांच का मांगा पूरा रिकॉर्ड


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से राज्य में संचालित स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि ऐसे हादसों के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या आपराधिक कार्रवाई की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने की। केस को “In Re: Nine Dead As Bus Erupts In Flames On Yamuna E-Way” के नाम से दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछले दो वर्षों में जारी किए गए स्लीपर बस परमिट का पूरा विवरण पेश किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि परमिट जारी करने से पहले बसों में किन-किन सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है और उत्तर प्रदेश में स्लीपर बसों का कितनी बार निरीक्षण किया गया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि राज्य में पहले हुए इसी तरह के बस अग्निकांडों में कितने मामले दर्ज हुए और उनमें क्या आपराधिक कार्रवाई की गई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य में पहले भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं। पीठ ने जुलाई 2023 में रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ हाईवे, नवंबर 2024 में कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और दिसंबर 2025 में मथुरा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस हादसों का भी उल्लेख किया।


हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया चिंता जताई कि एसी स्लीपर बसें संभवतः पर्याप्त जांच और जरूरी सुरक्षा उपायों के बिना संचालित हो रही हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से फायर एक्सटिंग्विशर जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल उठाया। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे हादसों के दौरान यात्रियों की जान बचाने के लिए बस चालक और कंडक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। अब राज्य सरकार को परमिट व्यवस्था, सुरक्षा मानकों, निरीक्षण और पूर्व में हुए हादसों पर कार्रवाई से संबंधित जानकारी हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।