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लखनऊ अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त: UP में प्राकृतिक आपदा के अलावा आग की घटनाओं के लिए मुआवजा नीति नहीं, सरकार को नई नीति बनाने का आदेश

लखनऊ के भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुआवजा नीति बनाने का निर्देश दिया है। सरकार ने अदालत को बताया कि मौजूदा नीति केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित है। कोर्ट ने कहा कि आग जैसी घटनाओं में मुआवजा तय करने के लिए स्पष्ट और समान मानक जरूरी हैं, ताकि भेदभाव और मनमानी से बचा जा सके।

Sonali26 सित. 2026, 03:20 PM IST
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लखनऊ अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त: UP में प्राकृतिक आपदा के अलावा आग की घटनाओं के लिए मुआवजा नीति नहीं, सरकार को नई नीति बनाने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के जून 2026 के भीषण अग्निकांड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को मुआवजा तय करने के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट को राज्य सरकार ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की मुआवजा नीति केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित है और आग जैसी अन्य घटनाओं में मुआवजा देने के लिए कोई निर्धारित नीति नहीं है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका लखनऊ में तीन मंजिला इमारत में संचालित एनीमेशन सेंटर में जून 2026 में लगी भीषण आग से संबंधित है। इस हादसे में 15 युवाओं की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए या दिव्यांग हुए।


मुआवजा तय करने के लिए समान मानक बनाने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी नीति तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कानून के तहत निर्धारित मुआवजे से बाहर आने वाले मामलों में पीड़ितों को कितनी और किस आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीठ ने कहा कि मुआवजा तय करने के लिए स्पष्ट मानक होना जरूरी है, ताकि अलग-अलग मामलों में भेदभाव और मनमानी न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा न हो कि कम पात्रता वाले मामले में अधिक मुआवजा मिल जाए और अधिक गंभीर मामले में कम राशि मिले। अदालत ने राज्य के संबंधित विभागों को आपस में विचार-विमर्श कर एक ऐसी नीति तैयार करने को कहा है।


अलग-अलग हादसों में अलग मुआवजे पर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले भी इस बात पर चिंता जताई थी कि अलग-अलग अग्निकांडों में पीड़ितों को अलग-अलग राशि का मुआवजा दिया गया। कोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में 50 लाख रुपये तक, कुछ में 25 लाख रुपये और वर्तमान मामले में कुछ लाख रुपये ही दिए गए। इसी वजह से अदालत ने सरकार से पूछा था कि मुआवजे की राशि तय करने का आधार क्या है।


पीड़ित परिवारों को करीब ₹11 लाख मिले

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित परिवारों को विभिन्न सरकारी फंड और स्रोतों से करीब 11 लाख रुपये की सहायता मिली है। इसमें मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 5 लाख रुपये, राज्य आपदा मोचन निधि से 4 लाख रुपये और प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये शामिल हैं। हालांकि, पीड़ित परिवारों की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ परिवारों को प्रधानमंत्री राहत कोष से मिलने वाली 2 लाख रुपये की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को स्थिति की पुष्टि करने का निर्देश दिया।


घायल युवक के इलाज का खर्च ₹70 हजार महीना

मामले में 25 वर्षीय जयंत गुप्ता का मुद्दा भी अदालत के सामने आया, जो अग्निकांड में घायल होने के बाद दिव्यांग हो गए। उनके वकील ने बताया कि जयंत का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा है और इलाज पर करीब 70 हजार रुपये प्रति माह खर्च हो रहा है। इसके बावजूद उन्हें अभी तक केवल 50 हजार रुपये का मुआवजा मिला है। हाईकोर्ट ने आग की घटनाओं में मुआवजे से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का भी संज्ञान लिया। इन फैसलों में ऐसी परिस्थितियों में मुआवजा निर्धारित करने के सिद्धांत बताए गए हैं, जहां कोई वैधानिक या सरकारी नीति मौजूद नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इन फैसलों को ध्यान में रखते हुए हलफनामा दाखिल करने और यह बताने का निर्देश दिया कि पीड़ितों को पहले से दी गई मुआवजा राशि में वृद्धि क्यों न की जाए।