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मोहम्मद जलालुद्दीन की गाड़ी में मिला 80 किलो गोमांस, ‘मुझे जानकारी नहीं थी’ की दलील नहीं आई काम; इलाहाबाद HC ने जब्ती बरकरार रखी

वाहन में 80 किलो गोमांस बरामद होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वाहन मालिक खुद उसी गाड़ी में मौजूद था तो वह ‘मुझे जानकारी नहीं थी’ कहकर जब्ती की कार्रवाई से नहीं बच सकता। कोर्ट ने कहा कि अधिकृत प्रयोगशाला से मांस के गोमांस होने की पुष्टि होने के बाद यात्रियों के सामान होने की दलील वाहन मालिक को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

Sonali26 सित. 2026, 03:08 PM IST
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मोहम्मद जलालुद्दीन की गाड़ी में मिला 80 किलो गोमांस, ‘मुझे जानकारी नहीं थी’ की दलील नहीं आई काम; इलाहाबाद HC ने जब्ती बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 के तहत वाहन जब्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामला 29 मार्च 2025 का है। संतकबीर नगर जिले के खलीलाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक वाहन की जांच की थी। तलाशी के दौरान वाहन से करीब 80 किलोग्राम मांस बरामद किया गया। उस समय वाहन में उसके पंजीकृत मालिक मोहम्मद जलालुद्दीन के साथ फैय्याज  नामक एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी वाहन में गोमांस बरामद होता है और वाहन का मालिक खुद उसी वाहन में मौजूद था, तो वह केवल यह दावा करके जब्ती की कार्रवाई से नहीं बच सकता कि बरामद मांस वाहन में सवार यात्रियों का था और उसे इसकी जानकारी नहीं थी। मामले में वाहन से करीब 80 किलोग्राम मांस बरामद किया गया था। वाहन मालिक की ओर से जब्ती की कार्रवाई का विरोध करते हुए दलील दी गई कि वाहन में यात्रा कर रहे लोगों ने मांस रखा था और उसका उस मांस से कोई संबंध नहीं था। वाहन मालिक का कहना था कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि वाहन में क्या रखा गया है। हाईकोर्ट ने हालांकि वाहन मालिक के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि वाहन का मालिक स्वयं उस समय वाहन में यात्रा कर रहा था, जब कथित गोमांस बरामद किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में केवल अज्ञानता का दावा करके वाहन को जब्ती की कार्रवाई से बाहर नहीं किया जा सकता।


अधिकृत लैब की रिपोर्ट अहम

अदालत ने यह भी माना कि जब्त किए गए मांस की जांच किसी अधिकृत प्रयोगशाला से कराई गई हो और रिपोर्ट में उसके गोमांस होने की पुष्टि हो जाए, तो उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई का आधार बनता है। इस मामले में बरामद मांस की अधिकृत प्रयोगशाला से जांच कराई गई थी और उसे गोमांस के रूप में पुष्टि की गई। इसके बाद वाहन की जब्ती को चुनौती दी गई थी। वाहन मालिक की ओर से यह तर्क दिया गया कि मांस यात्रियों का था, इसलिए वाहन मालिक को उसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कानून के तहत लागू अनुमान और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कहा कि वाहन मालिक की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से तब, जब वाहन में प्रतिबंधित मांस की बरामदगी हुई हो और उसकी प्रकृति की अधिकृत जांच में पुष्टि हो चुकी हो।


अज्ञानता का दावा पर्याप्त नहीं

कोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वाहन मालिक केवल यह कहकर जब्ती से राहत नहीं मांग सकता कि वाहन में मौजूद मांस यात्रियों का था। अदालत ने मामले के तथ्यों और वाहन मालिक की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए जब्ती की कार्रवाई को चुनौती देने वाली दलील पर विचार किया। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत गोवंश के वध और गोमांस से संबंधित गतिविधियों पर प्रतिबंध है। ऐसे मामलों में बरामदगी के साथ इस्तेमाल किए गए वाहन की जब्ती भी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा बन सकती है। हाईकोर्ट का यह फैसला इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकृत प्रयोगशाला से बरामद मांस के गोमांस होने की पुष्टि होने और वाहन मालिक के खुद वाहन में मौजूद होने की स्थिति में महज जानकारी न होने की दलील वाहन की जब्ती से बचने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। यह फैसला उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें प्रतिबंधित मांस की बरामदगी के साथ वाहन को जब्त किया जाता है और वाहन मालिक बाद में यह दावा करता है कि उसे वाहन में रखे सामान की जानकारी नहीं थी।