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सूचना नहीं थी तो कार्रवाई न करने पर पुलिस अधिकारी को लापरवाह नहीं ठहरा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा कि किसी घटना के संबंध में पुलिस अधिकारी को कोई सूचना या खुफिया जानकारी ही उपलब्ध नहीं थी, तो केवल कार्रवाई न करने के आधार पर उसे लापरवाह नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने विस्फोटक बरामदगी के बाद दोबारा कार्रवाई न करने के आरोप में पुलिस अधिकारी को दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि रद्द कर दी।

Sonali26 सित. 2026, 03:05 PM IST
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सूचना नहीं थी तो कार्रवाई न करने पर पुलिस अधिकारी को लापरवाह नहीं ठहरा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि किसी पुलिस अधिकारी को केवल इसलिए लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उसने कार्रवाई नहीं की, जबकि उसके पास कार्रवाई की आवश्यकता बताने वाली कोई सूचना या खुफिया जानकारी उपलब्ध ही नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस सूचना के आधार पर कार्रवाई करती है और सूचना के अभाव में कार्रवाई नहीं करने को अपने आप में लापरवाही नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने पुलिस चौकी प्रभारी नरेश सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल प्रविष्टि को रद्द कर दिया। कोर्ट ने मार्च 2026 में अधिकरण द्वारा पारित उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस अधिकारी के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को बरकरार रखा गया था।

घर से बरामद हुए थे बड़ी मात्रा में विस्फोटक

मामला मुजफ्फरनगर के खतौली थाना क्षेत्र का है। नरेश सिंह संबंधित समय में एक पुलिस चौकी के प्रभारी के पद पर तैनात थे। 7 नवंबर 2023 को शादाब नामक व्यक्ति के घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए थे। इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 286 और विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9B(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में मामले की जांच एक उपनिरीक्षक को सौंपी गई और आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को शादाब के घर में दोबारा विस्फोट हुआ। विस्फोट के कारण कंक्रीट की एक स्लैब गिर गई, जिससे दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद नरेश सिंह पर आरोप लगाया गया कि पहले बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के बावजूद उन्होंने शादाब के घर में दोबारा विस्फोटक जमा किए जाने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी और आवश्यक कार्रवाई नहीं की।

राज्य ने कहा- चौकी प्रभारी की थी निगरानी की जिम्मेदारी

पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई में उनके आचरण को सरकारी कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमानी बताया गया था। उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। नरेश सिंह ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह मूल विस्फोटक बरामदगी के मामले में विवेचक नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि शादाब के घर में दोबारा विस्फोटक जमा किए जा रहे हैं। वहीं, राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि पहली बरामदगी के बाद पुलिस अधिकारी को क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखनी चाहिए थी, क्योंकि उसे पहले ही अवैध रूप से विस्फोटक और पटाखा निर्माण की जानकारी थी।

हाईकोर्ट ने कहा- सूचना के बिना लापरवाही कैसे?

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं था, जिससे यह साबित हो कि शादाब के घर में दोबारा विस्फोटक जमा किए जाने के संबंध में पुलिस चौकी को कोई सूचना या खुफिया जानकारी मिली थी। खंडपीठ ने कहा, “पुलिस सूचना के आधार पर कार्रवाई करती है। सूचना का अभाव होने पर कार्रवाई नहीं करना लापरवाही नहीं कहा जा सकता।” कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि विस्फोट के बाद याचिकाकर्ता ने तत्काल कार्रवाई की थी। ऐसे में उनके खिलाफ लापरवाही का आधार स्थापित नहीं होता। हाईकोर्ट ने नरेश सिंह के खिलाफ की गई प्रतिकूल प्रविष्टि और अधिकरण के मार्च 2026 के आदेश को रद्द करते हुए याचिका मंजूर कर ली।

मामला: Naresh Singh vs. State of U.P. & Others