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पीएम के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड फोटो मामले में दिपके समेत 4 CJP नेताओं को HC का नोटिस, Meta को 24 घंटे में कंटेंट हटाने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की कथित मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में दिपके समेत 4 CJP नेताओं को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने Meta को 24 घंटे के भीतर संबंधित कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है। महिला ने आरोप लगाया है कि तस्वीरें जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रसारित की गईं और इसके बाद उसे धमकियां भी मिलीं।

Kashish Rai26 सित. 2026, 02:00 PM IST
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पीएम के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड फोटो मामले में दिपके समेत 4 CJP नेताओं को HC का नोटिस, Meta को 24 घंटे में कंटेंट हटाने का निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की कथित मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta को निर्देश दिया गया है कि वह 24 घंटे के भीतर संबंधित आपत्तिजनक कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाए। यह मामला एक महिला की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। महिला ने हाईकोर्ट में दावा किया है कि जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान उसकी मॉर्फ्ड और अश्लील तस्वीरों को कथित तौर पर प्रसारित किया गया। याचिका के अनुसार, इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को भी जोड़ा गया था। महिला ने आरोप लगाया है कि तस्वीरों के प्रसार के बाद उसे जान से मारने की धमकियां भी मिलीं। महिला ने अपनी याचिका में सोशल मीडिया पर मौजूद कथित डीपफेक और आपत्तिजनक तस्वीरों को हटाने के साथ-साथ संबंधित लिंक को ब्लॉक करने की मांग की थी। उसका कहना है कि इस तरह की सामग्री से उसकी निजता, प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।

सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने कोर्ट को बताया कि मामले में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, वकील के मुताबिक, अब तक कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी या पहचान को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक लिंक और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने के लिए भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुरुआत में टिप्पणी की कि सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री हटाने से जुड़ी राहत के लिए सिविल कोर्ट का रुख किया जा सकता है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि महिला को अलग-अलग अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। कोर्ट ने मामले की कार्यवाही अपने सामने ही जारी रखने का फैसला किया।

हाईकोर्ट ने पुलिस को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महिला से कहा कि वह जांच अधिकारी को अपना पता उपलब्ध कराए, ताकि पुलिस उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सके। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को असाधारण स्थिति बताया और पुलिस को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की बात कही। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में केवल महिला की शिकायत ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की तस्वीर के इस्तेमाल का पहलू भी जुड़ा हुआ है। इसी वजह से अदालत ने संबंधित कंटेंट को हटाने और मामले की जांच को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने Meta को नोटिस जारी करते हुए कथित आपत्तिजनक सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश सोशल मीडिया पर कथित मॉर्फ्ड और डीपफेक तस्वीरों के प्रसार को रोकने की मांग के बीच दिया गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी गैर-कानूनी गतिविधि के कारण महिला को नुकसान हुआ है, तो उसे कानून के तहत प्रदर्शन के आयोजकों से मुआवजे की मांग करने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा याचिका लंबित रहने के कारण महिला को कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य राहत का दावा करने से नहीं रोका जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने चारों नेताओं को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है और Meta को कथित आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।