law-order

यूनियन बैंक की गलती से तीसरे खाते में पहुंचे ₹1.09 लाख, वकील दंपति को ₹2.29 लाख की राहत

तेलंगाना के वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए एक वकील दंपति को कुल ₹2.29 लाख देने का आदेश दिया है। दंपति का आरोप था कि उनके ग्राहकों द्वारा किए गए चार भुगतान, जिनकी कुल रकम ₹1.09 लाख थी, उनके खाते के बजाय किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में जमा हो गए। आयोग ने बैंक को ₹1.09 लाख वापस करने के साथ ₹1 लाख मुआवजा और ₹10,000 मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया।

Kalpana Gautam27 सित. 2026, 11:41 PM IST
खबर शेयर करें:
यूनियन बैंक की गलती से तीसरे खाते में पहुंचे ₹1.09 लाख, वकील दंपति को ₹2.29 लाख की राहत

तेलंगाना के वारंगल में एक वकील दंपति का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में संयुक्त बचत खाता और करीब ₹57.80 लाख का प्रॉपर्टी टर्म लोन खाता था। लोन की 168 मासिक किस्तें तय थीं और हर महीने ₹66,684 की EMI उनके बचत खाते से काटी जाती थी।


दंपति के मुताबिक, फरवरी से दिसंबर 2024 के बीच उनके ग्राहकों ने चार अलग-अलग भुगतान किए। इन चारों की कुल रकम ₹1.09 लाख थी। आरोप है कि ये रकम उनके खाते में जमा होने के बजाय गलती से किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में क्रेडिट हो गई। दंपति ने बैंक को इस गलती की जानकारी दी। उनके मुताबिक, बैंक की ओर से समस्या ठीक करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने कानूनी नोटिस भी भेजा।


₹3.35 लाख की डेबिट ने बढ़ाया विवाद

मामले में सिर्फ ₹1.09 लाख के गलत क्रेडिट का विवाद नहीं था। दंपति ने आयोग को बताया कि फरवरी 2025 में उन्हें WhatsApp के जरिए पता चला कि उनके बचत खाते से ₹3.35 लाख डेबिट कर लोन खाते में ब्याज के तौर पर जमा किए गए हैं। इससे उनके बचत खाते में नकारात्मक बैलेंस दिखाई देने लगा।


बैंक की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि लोन पर ब्याज दर 11.95 फीसदी थी, जबकि सिस्टम में 9.40 फीसदी की दर से ब्याज काटा गया था। बैंक ने दावा किया कि ऑडिट के दौरान यह गलती सामने आई और इसी आधार पर बाकी ब्याज की राशि समायोजित की गई। हालांकि, उपभोक्ता आयोग के मुताबिक बैंक अपने इस दावे को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज, जैसे लोन एग्रीमेंट और ऑडिट रिपोर्ट, पेश नहीं कर सका।


आयोग ने क्या कहा?

वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जी. नागराजू और सदस्य वी. जनार्दन रेड्डी ने 24 अगस्त 2026 के आदेश में बैंक की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आयोग ने कहा कि ₹1.09 लाख की राशि तीसरे व्यक्ति के खाते में क्रेडिट किए जाने को सही ठहराने के लिए बैंक की ओर से पर्याप्त दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए गए। आयोग ने इसे बैंक की लापरवाही से जुड़ा अनधिकृत लेनदेन माना।


बैंक को कुल ₹2.29 लाख देने का आदेश

आयोग ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को दंपति के खाते में:

  • ₹1.09 लाख — गलत तरीके से तीसरे व्यक्ति के खाते में गई रकम के रूप में
  • ₹1 लाख — मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के मुआवजे के तौर पर
  • ₹10,000 — मुकदमे के खर्च के रूप में

कुल ₹2.29 लाख देने का निर्देश दिया।