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Ujjain में शाही मस्जिद को लेकर तनाव, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण की जद से हटाने की कार्रवाई को लेकर सोमवार को तनाव बढ़ गया। मस्जिद के आसपास जुटे लोगों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। पथराव की घटना के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। विवाद के बीच मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।

Kalpana Gautam28 सित. 2026, 12:57 PM IST
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Ujjain में शाही मस्जिद को लेकर तनाव, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को उस समय और बढ़ गया, जब प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। मामला सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है।

उज्जैन नगर निगम की योजना के मुताबिक संबंधित सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा किया जाना है। मस्जिद का एक हिस्सा प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है। इसी हिस्से को हटाने की कार्रवाई को लेकर पिछले दो दिनों से विरोध चल रहा था।


सोमवार सुबह हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। कई रिपोर्टों में पुलिस पर पथराव किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।


क्या पूरी मस्जिद गिराई जा रही है?

इस विवाद में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों के चलते यह धारणा बन रही है कि पूरी शाही मस्जिद को गिराने का आदेश दिया गया है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह दावा सही नहीं है।


मामला पूरी मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नहीं, बल्कि सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई में आने वाले हिस्से को हटाने का है। मस्जिद प्रबंधन ने नगर निगम की ओर से जारी नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 9 सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए नगर निगम की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।


कोर्ट के सामने मस्जिद प्रबंधन की ओर से दलील दी गई थी कि कार्रवाई से नमाज के हिस्से के अलावा करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा प्रभावित हो सकता है। वहीं नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण को विकास योजना और सिंहस्थ-2028 के दौरान यातायात प्रबंधन से जोड़ा था।


कोर्ट के फैसले के बाद भी विवाद क्यों?

9 सितंबर के आदेश के बाद मस्जिद प्रबंधन ने आगे की कानूनी चुनौती का रास्ता अपनाया। 28 सितंबर को मामले पर बड़ी पीठ में सुनवाई प्रस्तावित थी। इसी बीच मस्जिद के आसपास लोगों का जमावड़ा बढ़ गया।


मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों का तर्क है कि धार्मिक स्थल को सड़क चौड़ीकरण से अलग रखा जाना चाहिए और वैकल्पिक तरीके से सड़क का विस्तार किया जा सकता है। दूसरी ओर प्रशासन की दलील सड़क की क्षमता बढ़ाने और सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाले यातायात को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है।


हाईकोर्ट के 9 सितंबर के आदेश में यह भी दर्ज है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान अन्य धार्मिक संरचनाओं पर भी कार्रवाई हुई है। अदालत ने इसी व्यापक संदर्भ में नगर निगम की कार्रवाई को मनमाना मानने से इनकार किया था।


फिलहाल इलाके में भारी सुरक्षा

विरोध बढ़ने के बाद पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। रविवार रात से ही बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास मौजूद थे। सोमवार को स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।


फिलहाल उज्जैन में शाही मस्जिद विवाद केवल निर्माण या सड़क चौड़ीकरण का मामला नहीं रह गया है। इसके साथ कानून-व्यवस्था और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया भी जुड़ गई है। ऐसे में अब प्रशासन की कार्रवाई और अदालत में चल रही सुनवाई, दोनों पर नजर बनी हुई है।