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सिर्फ सामान्य FIR दर्ज होना हथियार लाइसेंस खारिज करने का आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ सामान्य FIR दर्ज होना लाइसेंस खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इनकार के लिए हथियार के दुरुपयोग, हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा को सीधे खतरे से जुड़ी ठोस सामग्री सामने आनी चाहिए।

Sonali28 सित. 2026, 12:59 PM IST
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सिर्फ सामान्य FIR दर्ज होना हथियार लाइसेंस खारिज करने का आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना।

पटना हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस जारी करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आवेदक के खिलाफ केवल सामान्य या नियमित FIR दर्ज होना अपने आप में हथियार लाइसेंस देने से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। लाइसेंस से इनकार करने के लिए प्रशासन के पास ऐसी ठोस सामग्री होनी चाहिए, जिससे हथियार के दुरुपयोग, हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सीधे खतरे की आशंका स्थापित होती हो। जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ एक बिल्डर और कंपनी के निदेशक की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने हथियार लाइसेंस के संबंध में प्रशासनिक निर्णय को चुनौती दी थी।

केवल FIR के आधार पर नहीं रोका जा सकता लाइसेंस

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR का पंजीकरण मात्र यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति हथियार के लाइसेंस का दुरुपयोग करेगा या उससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा होगा। प्रशासन को लाइसेंस के संबंध में निर्णय लेते समय मामले की वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री पर विचार करना होगा। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि यदि संबंधित FIR सामान्य प्रकृति की है और उसमें हथियार के दुरुपयोग या हिंसक गतिविधि से जुड़ी कोई सामग्री नहीं है, तो केवल उस FIR को आधार बनाकर हथियार लाइसेंस से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा ठोस आधार जरूरी

कोर्ट के अनुसार, हथियार लाइसेंस से इनकार का फैसला केवल आशंका या सामान्य आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह दिखाने वाली सामग्री जरूरी है कि आवेदक द्वारा हथियार का दुरुपयोग किए जाने, हिंसा में शामिल होने या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न करने की वास्तविक संभावना है।

हाईकोर्ट ने कहा कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी को अपने निर्णय के पीछे ठोस और प्रासंगिक आधार रखना होगा। महज किसी आपराधिक मामले में शामिल होने या FIR दर्ज होने को हथियार रखने के अधिकार से इनकार का स्वतः आधार नहीं माना जा सकता।

प्रशासन को मामले की परिस्थितियों पर करना होगा विचार

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हथियार लाइसेंस का आवेदन केवल आवेदक के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या देखकर तय नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित मामले की प्रकृति, आरोपों की गंभीरता और हथियार के संभावित दुरुपयोग से जुड़े तथ्यों का मूल्यांकन आवश्यक है। पटना हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां आपराधिक मामले में FIR दर्ज होने के बाद हथियार लाइसेंस के आवेदन को खारिज कर दिया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि FIR और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरे के बीच ठोस संबंध स्थापित किए बिना लाइसेंस से इनकार करना उचित आधार नहीं माना जा सकता।