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तलाक के बाद फिर साथ आए पति-पत्नी, हाईकोर्ट बोला- शादी जैसी पवित्र संस्था को हल्के में न लें

तलाक के बाद दोबारा एक-दूसरे से शादी करने वाले दो बच्चों के माता-पिता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप से बचाने का निर्देश देते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संस्था है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

Sonali28 सित. 2026, 12:57 PM IST
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तलाक के बाद फिर साथ आए पति-पत्नी, हाईकोर्ट बोला- शादी जैसी पवित्र संस्था को हल्के में न लें

प्रयागराज।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाक के बाद दोबारा एक-दूसरे से विवाह करने वाले दो बच्चों के माता-पिता के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन की रक्षा की है। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने की स्वतंत्रता है और कोई भी निजी या सार्वजनिक व्यक्ति उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में बाधा नहीं डाल सकता। हालांकि, कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि विवाह जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने दंपती की ओर से दाखिल याचिका पर सुनाया। याचिका में दंपती ने अपने वैवाहिक जीवन में किसी तरह के हस्तक्षेप से सुरक्षा और पुनर्विवाह के पंजीकरण में सहायता की मांग की थी। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता पहले पति-पत्नी थे और उनके दो बच्चे हैं। बाद में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। हालांकि, तलाक के बाद दोनों ने परिवार के हित में दोबारा साथ रहने और विवाह करने का निर्णय लिया। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को दोनों ने आर्य समाज मंदिर में पुनर्विवाह किया।  रिपोर्ट के मुताबिक, पति के पिता इस विवाह से सहमत नहीं थे। इसके बाद दंपती ने हाईकोर्ट का रुख किया और आशंका जताई कि उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए सिद्धांत का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के लिए स्वतंत्र है और उनके वैवाहिक जीवन में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जा सकती। हालांकि, पीठ ने दंपती के पहले तलाक और उसके बाद दोबारा विवाह करने की परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि विवाह की पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि यदि किसी मामूली विवाद के कारण पति-पत्नी आपसी सहमति से तलाक ले लें और बाद में, दो बच्चों के होने के बावजूद, दोबारा विवाह करें तो यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके बावजूद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंपती को अपने पसंद के व्यक्ति से विवाह करने और शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन जीने का कानूनी संरक्षण उपलब्ध रहेगा। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप से सुरक्षा प्रदान की। मामले का नाम Nitin Mishra v. Union of India And 6 Others है।