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Byju's के सह-संस्थापक Riju Ravindran को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, $8.40 लाख DIFC कोर्ट आदेश लागू कराने की मांग

Byju's के सह-संस्थापक Riju Ravindran को दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर Byju's Alpha की याचिका पर जवाब मांगा है। कंपनी ने DIFC Courts के 8.40 लाख अमेरिकी डॉलर के लागत संबंधी आदेश को भारत में लागू कराने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।

Sonali28 सित. 2026, 12:57 PM IST
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Byju's के सह-संस्थापक Riju Ravindran को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, $8.40 लाख DIFC कोर्ट आदेश लागू कराने की मांग


नई दिल्ली। 

दिल्ली हाईकोर्ट ने Byju's के सह-संस्थापक Riju Ravindran से Byju's Alpha Inc. की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें Dubai International Financial Centre (DIFC) Courts के 8.40 लाख अमेरिकी डॉलर के लागत संबंधी आदेश को भारत में लागू कराने की मांग की गई है। जस्टिस मनोज जैन ने मामले की सुनवाई करते हुए रविंद्रन को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामला Byju's की पैरेंट कंपनी Think & Learn Pvt Ltd से जुड़े विवाद से संबंधित है। Byju's Alpha Inc. अमेरिका के Delaware में पंजीकृत कंपनी है और Think & Learn समूह की कंपनी है। कंपनी ने DIFC Courts के 23 जनवरी 2026 के आदेश को भारत में लागू कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में execution petition दायर की है।


DIFC कोर्ट के समक्ष Byju's Alpha की ओर से दो दावे लंबित थे। रविंद्रन की ओर से दायर कुछ अर्जियों पर सुनवाई के दौरान DIFC कोर्ट ने उन्हें कंपनी की अनुमानित कानूनी लागत का लगभग 60 प्रतिशत यानी 8,40,000 अमेरिकी डॉलर 14 दिनों के भीतर अदा करने का निर्देश दिया था। यह लागत संबंधी आदेश उस समय आया जब DIFC कोर्ट ने रविंद्रन की उस चुनौती को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अमेरिकी Bankruptcy Court द्वारा उनके खिलाफ जारी 540.647 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अलग फैसले को लागू कराने से जुड़ी कार्यवाही का विरोध किया था। रविंद्रन ने अपने खिलाफ लगाए गए विभिन्न उपायों, जिसमें उनकी संपत्तियों पर worldwide freezing order भी शामिल था, को भी चुनौती दी थी। Byju's Alpha का कहना है कि DIFC कोर्ट का लागत संबंधी आदेश एक विदेशी डिक्री है और इसे भारत में Civil Procedure Code (CPC) की धारा 44A के तहत लागू कराया जा सकता है। कंपनी ने Section 44A(2) का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी अदालत से जारी penal notice ने उस वैधानिक आवश्यकता को पूरा कर दिया है, जिसके तहत विदेशी डिक्री की execution के लिए यह प्रमाणित करने वाला दस्तावेज जरूरी होता है कि डिक्री किस सीमा तक संतुष्ट या समायोजित की गई है।

कंपनी के मुताबिक, DIFC Courts द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी penal notice में दर्ज किया गया कि 23 जनवरी का आदेश अंतिम और लागू करने योग्य है। Byju's Alpha ने इसे Section 44A(2) की आवश्यकता पूरी करने वाला दस्तावेज बताते हुए बॉम्बे और दिल्ली हाईकोर्ट के कुछ फैसलों पर भरोसा किया है। वहीं, Riju Ravindran की ओर से execution petition की maintainability पर आपत्ति जताई गई है। उनके वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और सभी अधिकारों व दलीलों को सुरक्षित रखा।

Byju's Alpha ने रविंद्रन की संपत्तियों से संबंधित राहत के लिए भी आवेदन दायर किए हैं। इनमें से एक आवेदन CPC के Order XXI Rules 46 और 12 के साथ Sections 60 और 151 के तहत दाखिल किया गया है। Think & Learn Pvt Ltd के Resolution Professional को भी इस आवेदन में पक्षकार बनाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।

मामले का नाम Byjus Alpha Inc v. Riju Ravindran है