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यूपी के रेस्टोरेंट्स में हुक्का बार पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- कानून का सीधा उल्लंघन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रेस्टोरेंट्स में हुक्का बार चलाने पर रोक लगा दी है। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि रेस्टोरेंट में हुक्का सेवा देना COTPA Act और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Designated Smoking Area में भी हुक्का सेवा की अनुमति नहीं है और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर सकती है।

Sonali29 सित. 2026, 08:41 PM IST
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यूपी के रेस्टोरेंट्स में हुक्का बार पर रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- कानून का सीधा उल्लंघन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रेस्टोरेंट्स में हुक्का बार चलाने और हुक्का सेवा देने पर रोक लगा दी है। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की डिवीजन बेंच ने कहा कि रेस्टोरेंट्स में हुक्का बार का संचालन सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियमों और Cigarettes and Other Tobacco Products Act (COTPA) के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह फैसला उन विभिन्न रेस्टोरेंट संचालकों की याचिकाओं पर आया, जिन्होंने हुक्का बार चलाने के अपने कारोबार में पुलिस के हस्तक्षेप को चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट्स द्वारा हुक्का बार चलाना और ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 के Rule 4(3) और 2017 के संशोधन का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि हुक्का सेवा COTPA की योजना और उद्देश्य के भी सीधे खिलाफ है।

हुक्का सेवा पर कोई अपवाद नहीं

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि 2017 में Rule 4(3) में किए गए संशोधन के बाद Designated Smoking Area में भी किसी प्रकार की सेवा की अनुमति नहीं है। कोर्ट के अनुसार इस प्रतिबंध में भोजन, पेय पदार्थ, तंबाकू उत्पाद, हर्बल उत्पाद और हुक्का जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसका मतलब है कि रेस्टोरेंट किसी अलग या निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी ग्राहकों को हुक्का सेवा उपलब्ध नहीं करा सकते। कोर्ट ने कहा कि हुक्का की ‘सेवा’ पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके लिए कोई अपवाद नहीं बनाया गया है।

फूड सेफ्टी विभाग और नगर निकाय लाइसेंस नहीं दे सकते

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी विभाग और नगर निगम या अन्य नगर निकायों के पास रेस्टोरेंट्स में हुक्का पीने को रेगुलेट करने अथवा हुक्का बार के संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि COTPA के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ पुलिस को तलाशी लेने, सामान जब्त करने, उसे कब्जे में लेने और कानून के तहत जुर्माना लगाने की शक्ति प्राप्त है।

साफ हवा में सांस लेना मौलिक अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सार्वजनिक स्थानों पर गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों के स्वास्थ्य और अधिकारों पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रतिष्ठान के व्यापार करने के अधिकार को गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार के ऊपर नहीं रखा जा सकता। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) व्यापार या व्यवसाय करने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन है।

पुलिस कर सकती है कार्रवाई

हाईकोर्ट ने साफ किया कि यदि कोई रेस्टोरेंट COTPA के तहत निर्धारित प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है और हुक्का सेवा जारी रखता है, तो पुलिस उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट्स द्वारा हुक्का बार का संचालन और हुक्का सेवा देना Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 के Rule 4(3) का उल्लंघन है। इसलिए रेस्टोरेंट संचालक केवल यह तर्क देकर हुक्का सेवा जारी नहीं रख सकते कि उनके पास कोई स्थानीय या अन्य लाइसेंस है।

इस फैसले के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट्स और हुक्का बार के संचालन को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने दोहराया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से जुड़े कानूनों का पालन अनिवार्य है और निर्धारित स्मोकिंग एरिया भी हुक्का सेवा के लिए अपवाद नहीं है।