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डॉक्टरों से मारपीट मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन में सरेंडर का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने डोंबिवली के डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से कथित मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश सुखर्या म्हात्रे को मिली जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करते हुए म्हात्रे को तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मेडिकल फ्रेटरनिटी पर इस तरह के हमलों के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा संदेश जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को डॉक्टरों से मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश सुखर्या म्हात्रे को मिली जमानत रद्द कर दीडॉक्टरों से मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश सुखर्या म्हात्रे को मिली जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 अगस्त के जमानत आदेश को रद्द करते हुए म्हात्रे को तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मेडिकल फ्रेटरनिटी पर इस तरह के हमलों के खिलाफ स्पष्ट संदेश जाना चाहिए। यह मामला महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्रीनगर अस्पताल में 6 जुलाई को डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है। मामले में रमेश म्हात्रे समेत पांच आरोपियों के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों पर हमला, जानबूझकर चोट पहुंचाना, दंगा, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज ऑर लॉस टू प्रॉपर्टी) एक्ट, 2010 के तहत भी आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट के 7 अगस्त के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि मेडिकल फ्रेटरनिटी पर इस तरह हमला नहीं किया जा सकता और मामले में स्पष्ट संदेश जाना चाहिए। म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत बरकरार रखने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी करीब 19 दिन हिरासत में रह चुका है। उन्होंने बताया कि ट्रायल शुरू हो चुका है और अभियोजन पक्ष के दो गवाहों की गवाही हो चुकी है। शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर की गवाही 3 अक्टूबर को होनी है। दवे ने दलील दी कि मामला मजिस्ट्रेट से विचारणीय है और आरोपी ने जांच तथा ट्रायल में सहयोग किया है।
दवे ने यह भी कहा कि म्हात्रे के खिलाफ बताए गए 19 आपराधिक मामलों में से 18 में उन्हें बरी किया जा चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और अस्पताल में तीन डॉक्टरों, जिसमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल है, पर कथित हमले को ध्यान में रखा। मामले की शुरुआत 6 जुलाई की उस घटना से हुई, जिसमें एक नौ महीने की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में कई घंटे इंतजार करना पड़ा था। म्हात्रे का दावा है कि महिला के परिवार के बार-बार फोन करने के बाद वह अस्पताल पहुंचे थे और इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों के साथ विवाद हुआ। 7 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें म्हात्रे को आरोपी नंबर एक बनाया गया। 14 जुलाई को कल्याण के मजिस्ट्रेट ने म्हात्रे को जमानत दे दी थी। इसके बाद डॉक्टरों के विरोध के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को मामले का स्वत: संज्ञान लिया और मजिस्ट्रेट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी। बाद में 7 अगस्त को हाईकोर्ट ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ म्हात्रे को दोबारा जमानत दे दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद कोर्ट ने अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले को गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान पालघर में डॉक्टरों पर कथित हमले की एक अन्य घटना का भी उल्लेख हुआ। म्हात्रे की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह पालघर की घटना में शामिल नहीं थे। आखिरकार महाराष्ट्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द कर दिया और रमेश म्हात्रे को तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल को जल्द पूरा करने के लिए तय की गई समयसीमा में भी हस्तक्षेप नहीं किया।
केस नंबर: Crl.A. No. 004604/2026
केस टाइटल: State of Maharashtra vs. Ramesh Sukrya Mhatre
