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कल्याण रेलवे स्टेशन पर चोरी हुए गहनों पर कोर्ट का फैसला, पिघली सोने की सिल्ली पीड़िता को लौटाने का आदेश
कल्याण के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने रेलवे स्टेशन से चोरी हुए सोने के गहनों को पिघलाकर बनाई गई करीब 3.42 लाख रुपये की सोने की सिल्ली मूल शिकायतकर्ता को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी अपराध कबूल कर चुके हैं और जांच अधिकारी को भी सोना सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं थी।

कल्याण।
कल्याण के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने रेलवे स्टेशन से चोरी हुए सोने के गहनों को पिघलाकर बनाई गई करीब 3.42 लाख रुपये की सोने की सिल्ली की कस्टडी मूल शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी चोरी के मामले में अपना अपराध स्वीकार कर चुके हैं और जांच अधिकारी ने भी बरामद सोना शिकायतकर्ता को सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। ऐसे में मजिस्ट्रेट द्वारा सोने की कस्टडी देने से इनकार करना उचित नहीं था। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.वी. ताम्हणकर ने 28 सितंबर 2026 को क्रिमिनल रिवीजन आवेदन संख्या 56/2023 में पारित किया। मामला कल्याण रेलवे पुलिस स्टेशन के सीआर नंबर 297/2022 से जुड़ा था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 379, 411, 414 और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार 15 मार्च 2022 की रात करीब 9:05 बजे मनीषा श्रीकृष्ण सुपे अपनी मां ज्योति और बहन मंजुषा के साथ कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर ट्रेन नंबर 12111 पकड़ने पहुंची थीं। इसी दौरान दो अज्ञात आरोपियों ने उनकी मां का बैग छीन लिया। बैग में सोने के आभूषणों के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सामान मौजूद था। चोरी हुए सामान की कुल कीमत करीब 3,51,500 रुपये बताई गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि चोरी किए गए सोने के आभूषणों को उनके मूल रूप में नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें पिघलाकर सोने की सिल्ली में बदल दिया गया था। पुलिस ने यह सोना एक सुनार के पास से बरामद किया था।
पीड़िता ने मांगी थी सोने की कस्टडी
मामले की जांच पूरी होने के बाद मनीषा सुपे ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 451 के तहत बरामद सोने की कस्टडी दिए जाने की मांग की। हालांकि, कल्याण रेलवे मजिस्ट्रेट ने 16 जनवरी 2023 को आवेदन खारिज कर दिया। मजिस्ट्रेट का मुख्य आधार यह था कि बरामद सोना मूल आभूषणों के रूप में नहीं था, बल्कि उसे पिघलाकर सोने की सिल्ली बना दी गई थी। इसके बाद मनीषा सुपे ने इस आदेश को अतिरिक्त सत्र अदालत में चुनौती दी।
सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को माना गलत
अतिरिक्त सत्र अदालत ने पाया कि दोनों आरोपियों ने मामले में अपना अपराध स्वीकार किया था और 12 नवंबर 2022 को उन्हें दोषी ठहराया जा चुका था। जांच अधिकारी ने भी सोने की सिल्ली की कस्टडी शिकायतकर्ता को देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। अदालत ने यह भी देखा कि चोरी हुए सोने की कीमत करीब 3,51,500 रुपये थी, जबकि बरामद सोने की सिल्ली का मूल्य करीब 3,42,500 रुपये था। अदालत ने माना कि दोनों रकम के बीच अंतर इतना अधिक नहीं है कि केवल इस आधार पर पीड़िता के दावे को खारिज किया जाए। अदालत के सामने पीड़िता ने मूल आभूषणों से संबंधित बिल और रसीदें भी पेश की थीं। इसके अलावा उनकी मां और पति ने भी हलफनामे देकर उनके दावे का समर्थन किया था। बरामद सोने पर किसी अन्य व्यक्ति ने भी अपना दावा नहीं किया था।
5 लाख रुपये के बॉन्ड पर मिलेगी कस्टडी
अदालत ने कहा कि जब मूल आपराधिक मामला पहले ही समाप्त हो चुका है और जांच अधिकारी को भी सोना सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है, तो बरामद सोने को लंबे समय तक पुलिस स्टेशन में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। अदालत ने 16 जनवरी 2023 के मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए रिवीजन याचिका मंजूर कर ली। साथ ही, सीआर नंबर 297/2022 और आरसीसी नंबर 1231/2022 में बरामद सोने की सिल्ली की कस्टडी मनीषा श्रीकृष्ण सुपे को देने का आदेश दिया। यह कस्टडी 5 लाख रुपये के बॉन्ड पर दी जाएगी। बॉन्ड में यह शर्त होगी कि यदि अदालत किसी अन्य व्यक्ति को उक्त सोना सौंपने का आदेश देती है, तो शिकायतकर्ता उसे अदालत के समक्ष पेश करेंगी।
