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25 साल पुराने बिजली चोरी केस में कल्याण कोर्ट का फैसला, शिकायतकर्ता और गवाह कोर्ट में नहीं आए; आरोपी बरी
कल्याण कोर्ट ने 25 साल पुराने बिजली चोरी के मामले में आरोपी मोईद्दीन अहमद कुट्टी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि मामले के शिकायतकर्ता और अन्य गवाह कोर्ट में पेश नहीं हुए और अभियोजन पक्ष केवल समन्स बजाने वाले अधिकारी की गवाही करा सका। ऐसे में 74,692 यूनिट बिजली चोरी और करीब 4.48 लाख रुपये के नुकसान का आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सका।

कल्याण कोर्ट ने 25 साल पुराने बिजली चोरी के मामले में आरोपी मोईद्दीन अहमद कुट्टी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि मामले के मूल शिकायतकर्ता और अन्य महत्वपूर्ण गवाह कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। अभियोजन पक्ष केवल समन्स बजाने वाले अधिकारी की गवाही करा सका। ऐसे में बिजली चोरी के आरोप को संदेह से परे साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया। प्रथमवर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर 4, कल्याण की पीठासीन अधिकारी एस. ए. पठाण ने 24 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। मामला कोळसेवाडी पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 135/2000 से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार, 30 नवंबर 2000 को नेतीवली, कल्याण-पूर्व स्थित एक परिसर में महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल के मीटर से कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप था कि स्वीकृत 10 हॉर्सपावर के भार के बावजूद करीब 17 हॉर्सपावर बिजली का इस्तेमाल किया गया।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपी पक्ष ने विद्युत मंडल की अनुमति के बिना मीटर की इनकमिंग लाइन से अलग-अलग स्थानों, जिनमें एसटीडी बूथ, होटल, घर और व्यावसायिक गाले शामिल थे, बिजली की वायरिंग कर बिजली का इस्तेमाल किया। अभियोजन के मुताबिक, इस तरह कुल 74,692 यूनिट बिजली की चोरी की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 4.48 लाख रुपये थी। इस मामले में भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 39 और 44 के तहत आरोप लगाए गए थे। केस 4 जनवरी 2001 को कोर्ट में दाखिल हुआ था और करीब 25 साल तक लंबित रहा। रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी नंबर 3 अशोक लक्ष्मण कुरकुरे की मृत्यु हो चुकी थी, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई। वहीं आरोपी नंबर 2, 4 और 5 के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें फरार घोषित किया गया था।
आरोपी नंबर 1 मोईद्दीन अहमद कुट्टी के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल आगे बढ़ाया गया। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में केवल एक गवाह, फिरोज फत्तू तडवी, को पेश किया। वह समन्स बजाने वाले अधिकारी थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों को समन्स जारी किए गए थे, लेकिन दिए गए पते पर तलाश करने के बावजूद वे नहीं मिले। उनके संबंध में कोई उपयोगी जानकारी भी प्राप्त नहीं हो सकी। इस संबंध में 17 अगस्त 2026 को रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। कोर्ट ने माना कि मूल शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपी के खिलाफ बिजली चोरी का आरोप साबित करने वाला कोई पर्याप्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया। अदालत ने यह भी कहा कि केवल समन्स बजाने वाले अधिकारी की गवाही से आरोप सिद्ध नहीं होता।
अदालत ने मामले के 25 वर्ष से अधिक समय से लंबित रहने का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों की गवाही के लिए मामले को आगे अनिश्चित समय तक लंबित रखना उचित नहीं होगा। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसके आधार पर कोर्ट ने मोईद्दीन अहमद कुट्टी को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 39 और 44 के आरोपों से बरी कर दिया। वहीं आरोपी नंबर 2 हेमंत अंबादास क्षिरसागर, आरोपी नंबर 4 योगेश माणिकराव झुरकडे और आरोपी नंबर 5 गौतम बनवाली श्रीवास्तव को भी धारा 239 के तहत आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। कोर्ट ने जब्त बिजली की तारों को अपील की अवधि समाप्त होने के बाद सार्वजनिक नीलामी में बेचकर प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा करने का निर्देश दिया।
