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गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की केजरीवाल की अपील, कहा- PM की शैक्षणिक डिग्री निजी जानकारी, खुलासे में कोई बड़ा जनहित नहीं

गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे की मांग वाले मामले में अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता का संवैधानिक पद पर उनके निर्वाचन से कोई संबंध नहीं है और इसके खुलासे में ऐसा कोई बड़ा जनहित नहीं है जो निजी जानकारी की सुरक्षा को प्रभावित करे।

Sonali30 सित. 2026, 05:40 PM IST
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गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की केजरीवाल की अपील, कहा- PM की शैक्षणिक डिग्री निजी जानकारी, खुलासे में कोई बड़ा जनहित नहीं

गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के खुलासे के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी निजी सूचना है और इसके खुलासे के लिए ऐसा कोई बड़ा जनहित सामने नहीं आया है, जो इसके प्रकटीकरण को उचित ठहरा सके। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2016 के निर्देश से संबंधित है। गुजरात यूनिवर्सिटी ने CIC के इस निर्देश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मार्च 2023 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने CIC के निर्देश को रद्द करते हुए कहा था कि RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के खुलासे से छूट प्राप्त है। अदालत ने इस मामले में केजरीवाल पर ₹25,000 की लागत भी लगाई थी। इसके खिलाफ केजरीवाल ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ ने 24 सितंबर को मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। 29 सितंबर को कोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ₹25,000 की लागत लगाने वाले आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी RTI के तहत सार्वजनिक की जा सकती है। कोर्ट ने इस संदर्भ में कहा कि प्रधानमंत्री एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता का उनके संवैधानिक पद के लिए निर्वाचन से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसलिए केवल इस आधार पर कि वह एक सार्वजनिक पद पर हैं, उनकी डिग्री की जानकारी को सार्वजनिक करने का अधिकार नहीं बनता।


हाईकोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित जानकारी के खुलासे के लिए बड़े जनहित का आधार मौजूद नहीं है। पहले के एकल पीठ के आदेश में भी कहा गया था कि RTI Act की संबंधित धाराओं के तहत व्यक्तिगत जानकारी को तब तक सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक बड़े जनहित का ठोस आधार न हो। मामले में गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से यह तर्क भी दिया गया था कि RTI कानून का इस्तेमाल ऐसी जानकारी हासिल करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिसका सार्वजनिक प्रशासन या किसी पद की पात्रता से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के RTI संबंधी पुराने फैसलों का भी हवाला दिया गया था। इस तरह गुजरात हाईकोर्ट ने केजरीवाल की अपील को खारिज करते हुए पहले के आदेश और ₹25,000 की लागत को बरकरार रखा। अदालत के आदेश का प्रभाव यह है कि इस मामले में प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के खुलासे के लिए CIC का पुराना निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।