law-order

पुलिस स्टेशन का CCTV बंद मिला तो पुलिस की बढ़ सकती है मुश्किल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी-पूछताछ पर दिए अहम निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस स्टेशन का CCTV काम नहीं कर रहा हो, तब भी गिरफ्तारी या पूछताछ के लिए लाए गए व्यक्ति का पूरा विवरण जनरल डायरी (GD) में तत्काल दर्ज करना जरूरी है। CCTV फुटेज गायब होने और समकालीन रिकॉर्ड नहीं बनाए जाने पर पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

Sonali30 सित. 2026, 07:29 PM IST
खबर शेयर करें:
पुलिस स्टेशन का CCTV बंद मिला तो पुलिस की बढ़ सकती है मुश्किल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी-पूछताछ पर दिए अहम निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों के काम नहीं करने की स्थिति में गिरफ्तार किए गए या पूछताछ के लिए लाए गए लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि CCTV सिस्टम बंद होने की स्थिति में पुलिस को जनरल डायरी (GD) में संबंधित व्यक्ति के थाने में आने, पूछताछ और जाने का विवरण उसी समय दर्ज करना होगा। CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने और समकालीन रिकॉर्ड नहीं बनाए रखने पर पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने स्पष्ट किया कि एक बार पुलिस स्टेशन में CCTV सिस्टम चालू हो जाने के बाद उसे 24 घंटे, सातों दिन और पूरे साल कार्यशील रखा जाना चाहिए। यदि किसी तकनीकी कारण से CCTV सिस्टम खराब हो जाता है, तो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को GD में कैमरे के खराब होने का समय दर्ज करना होगा। साथ ही यह भी दर्ज करना होगा कि खराबी की सूचना लिखित रूप से किस अधिकारी को दी गई है। कोर्ट ने कहा कि CCTV खराब होने की जानकारी जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को भी दी जानी चाहिए। SP को यह सुनिश्चित करना होगा कि कैमरे का डाउनटाइम कम से कम रहे और उन्हें जल्द से जल्द ठीक कराकर दोबारा चालू कराया जाए। मरम्मत और सिस्टम को बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों का रिकॉर्ड भी रखा जाना चाहिए।

पूछताछ के लिए थाने लाए गए व्यक्ति का दर्ज होगा पूरा विवरण

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि CCTV उपलब्ध नहीं होने की अवधि में पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन लाए गए प्रत्येक व्यक्ति का नाम, थाने में आने की तारीख और समय GD में दर्ज किया जाए। यदि पूछताछ के बाद व्यक्ति को छोड़ दिया जाता है, तो उसके जाने की तारीख और समय भी दर्ज किया जाना चाहिए। इसके अलावा पुलिस को उस व्यक्ति से या उसके परिजन से एक रसीद लेने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह दर्ज हो कि उसे पुलिस स्टेशन से जाने की अनुमति दे दी गई है और उसे किस व्यक्ति के साथ या किसके सुपुर्द किया गया। गिरफ्तार व्यक्ति के मामले में गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी की जानकारी दर्ज होती है, लेकिन CCTV बंद रहने की अवधि में भी अन्य जरूरी रिकॉर्ड बनाए रखना होगा।

रिकॉर्ड नहीं होने पर पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष

कोर्ट ने कहा कि इन सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करने पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 119(g) के तहत पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इस प्रावधान के तहत यदि ऐसा साक्ष्य उपलब्ध था जिसे पेश किया जा सकता था, लेकिन उसे पेश नहीं किया गया, तो अदालत उसके उपलब्ध नहीं कराने वाले पक्ष के खिलाफ अनुमान लगा सकती है। यह निर्देश राघवेंद्र दुबे की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे अवैध रूप से हिरासत में लेकर चित्रकूट के सरधुवा पुलिस स्टेशन लाया गया था। कोर्ट के अनुसार, CCTV रिकॉर्ड से याचिकाकर्ता के 13 जुलाई 2026 को सुबह करीब 9 बजे पुलिस स्टेशन में आने और बाद में जांच अधिकारी के साथ बाहर जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, पुलिस स्टेशन के तीन कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं थी, जबकि दो अन्य कैमरों की फुटेज मौजूद थी। कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध परिस्थितियों में संबंधित फुटेज को जानबूझकर हटाए जाने या DVR में सुरक्षित नहीं किए जाने की बात सामने आती है। कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता पुलिस के नियंत्रण में था और उसकी गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर कमियां थीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी को रद्द करते हुए, किसी अन्य मामले में जरूरत न होने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया। 24 घंटे की अवैध हिरासत के लिए राज्य को याचिकाकर्ता को ₹10,000 का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि CCTV एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है और तकनीकी खराबी संभव है, लेकिन कैमरे खराब होने का मतलब यह नहीं हो सकता कि पुलिस स्टेशन में लाए गए व्यक्ति की गतिविधियों का कोई समकालीन रिकॉर्ड ही न रखा जाए। CCTV की अनुपलब्धता के दौरान GD में प्रवेश, पूछताछ, गिरफ्तारी और रिहाई से संबंधित रिकॉर्ड बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।