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S.125 CrPC: बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी माता-पिता दोनों की, कमाने वाली मां जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल पिता पर नहीं डाली जा सकती। माता-पिता दोनों को अपनी आय और आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के भरण-पोषण में योगदान देना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कमाने वाली मां, खासकर जब उसकी आय पिता से अधिक हो, बच्चों के भरण-पोषण और अन्य खर्चों में योगदान देने की जिम्मेदारी से पूरी तरह इनकार नहीं कर सकती।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धारा 125 CrPC के तहत नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी किसी एक माता-पिता पर विशेष रूप से नहीं डाली जा सकती। माता-पिता दोनों को अपनी-अपनी आर्थिक क्षमता और साधनों के अनुसार बच्चे के खर्च में योगदान करना होता है।
जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी एक महिला और उसके दो बच्चों की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दोनों नाबालिग बच्चों के लिए पिता को 1,500-1,500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। फैमिली कोर्ट ने महिला की अपने पति से खुद के लिए भरण-पोषण की मांग स्वीकार नहीं की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों नाबालिग बच्चों के लिए पिता को मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ महिला और बच्चों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
मां की आय पिता से अधिक होने पर क्या कहा कोर्ट ने?
हाईकोर्ट ने धारा 125 CrPC की योजना और विशेष रूप से धारा 125(1)(b) और 125(1)(c) पर विचार किया। इन प्रावधानों के तहत ऐसे नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण का प्रावधान है, जो खुद अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून में बच्चे को अपने “father or mother” यानी पिता या मां से भरण-पोषण मांगने का अधिकार दिया गया है। इसलिए इस वैधानिक जिम्मेदारी को केवल पिता तक सीमित नहीं किया जा सकता। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 125 में इस्तेमाल किए गए “his” शब्द को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल पुरुष अभिभावक की है। प्रावधान का उद्देश्य बच्चे के भरण-पोषण को सुनिश्चित करना है और इसके लिए माता-पिता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि मां खुद कमाती है तो वह केवल इस आधार पर बच्चों के भरण-पोषण में योगदान करने की जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकती। खासकर ऐसी स्थिति में, जब मां की आय पिता की आय से अधिक हो, तो बच्चे के खर्च में दोनों की आर्थिक क्षमता के अनुसार योगदान पर विचार किया जाना चाहिए।
पिता पर पूरी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती
हाईकोर्ट ने माना कि बच्चे के भरण-पोषण का उद्देश्य केवल पिता से राशि दिलाना नहीं है, बल्कि बच्चे की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना है। इसलिए माता-पिता दोनों की आय, आर्थिक क्षमता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।mइस मामले में फैमिली कोर्ट ने प्रत्येक बच्चे के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह का भरण-पोषण निर्धारित किया था। हाईकोर्ट ने आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और महिला तथा बच्चों की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। कोर्ट की यह टिप्पणी विशेष रूप से उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां दोनों माता-पिता कमाते हैं और उनके बीच बच्चे के भरण-पोषण को लेकर विवाद होता है। फैसला यह स्पष्ट करता है कि धारा 125 CrPC के तहत नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी माता-पिता की आर्थिक क्षमता के अनुसार साझा हो सकती है।
