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दुर्घटना मुआवजा: टैंकर में खतरनाक सामान था या नहीं, बीमा कंपनी को साबित करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कि चालक के लाइसेंस में खतरनाक सामान ले जाने का Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) नहीं था। कंपनी को पहले यह साबित करना होगा कि दुर्घटना के समय टैंकर वास्तव में Central Motor Vehicles Rules, 1989 के तहत निर्धारित खतरनाक सामान ले जा रहा था।

Sonali01 अक्टू. 2026, 07:04 PM IST
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दुर्घटना मुआवजा: टैंकर में खतरनाक सामान था या नहीं, बीमा कंपनी को साबित करना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले में बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि बीमा कंपनी यह दावा करती है कि चालक के पास Hazardous Goods (खतरनाक सामान) ले जाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस में आवश्यक Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) नहीं था, तो केवल लाइसेंस में Endorsement की अनुपस्थिति पर्याप्त नहीं होगी। बीमा कंपनी को यह भी साबित करना होगा कि दुर्घटना के समय वाहन वास्तव में ऐसे सामान का परिवहन कर रहा था, जिसे कानून के तहत Hazardous Goods (खतरनाक सामान) माना गया है।

जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने यह टिप्पणी National Insurance Company Ltd., Lucknow through Assistant Manager बनाम Reena Devi एवं अन्य मामले में की। यह मामला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे के खिलाफ बीमा कंपनी की चुनौती से संबंधित था। विवाद का मुख्य मुद्दा यह था कि दुर्घटना में शामिल टैंकर के चालक के ड्राइविंग लाइसेंस में Hazardous Goods (खतरनाक सामान) ले जाने के लिए आवश्यक Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) नहीं था। बीमा कंपनी ने इसी आधार पर मुआवजे की जिम्मेदारी से बचने का तर्क दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि इस तर्क को स्वीकार करने के लिए केवल चालक के लाइसेंस को देखना पर्याप्त नहीं है। बीमा कंपनी को पहले यह स्थापित करना होगा कि संबंधित टैंकर दुर्घटना के समय वास्तव में ऐसा सामान लेकर चल रहा था, जो Central Motor Vehicles Rules, 1989 के तहत Dangerous or Hazardous Goods (खतरनाक या जोखिमपूर्ण सामान) की श्रेणी में आता है।

Central Motor Vehicles Rules में क्या प्रावधान है?

Central Motor Vehicles Rules, 1989 के Rule 9 में Dangerous or Hazardous Goods (खतरनाक या जोखिमपूर्ण सामान) ले जाने वाले मालवाहक वाहनों के चालकों के लिए अतिरिक्त योग्यता और प्रशिक्षण का प्रावधान है। नियम के अनुसार ऐसे चालक को निर्धारित प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है और ड्राइविंग लाइसेंस में यह Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) किया जाता है कि वह खतरनाक सामान ले जाने वाले मालवाहक वाहन को चलाने के लिए अधिकृत है।  इसी तरह Rule 132 के तहत ऐसे सामान का परिवहन करने वाले वाहन के मालिक की भी जिम्मेदारी तय की गई है। मालिक को यह सुनिश्चित करना होता है कि वाहन खतरनाक सामान के परिवहन के लिए पंजीकृत हो और चालक के पास Rule 9 के अनुरूप लाइसेंस हो।  हालांकि, हाईकोर्ट के सामने सवाल यह था कि क्या बीमा कंपनी बिना यह साबित किए कि टैंकर में वास्तव में Hazardous Goods (खतरनाक सामान) मौजूद था, केवल लाइसेंस में Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) की कमी के आधार पर बीमा पॉलिसी के तहत अपनी जिम्मेदारी से बच सकती है।

कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और प्रमाण की आवश्यकता पर जोर दिया। यानी पहले यह स्थापित करना जरूरी है कि वाहन में उस समय कौन-सा सामान ले जाया जा रहा था और क्या वह सामान नियमों के तहत Hazardous Goods (खतरनाक सामान) की श्रेणी में आता था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ

Hazardous Goods (खतरनाक सामान) के परिवहन से जुड़े लाइसेंस Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट भी अप्रैल 2025 में फैसला दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि Rule 9 के तहत खतरनाक सामान ले जाने वाले वाहन के चालक के लाइसेंस में आवश्यक Endorsement जरूरी है और उल्लंघन की स्थिति में बीमा कंपनी को कुछ परिस्थितियों में “Pay and Recover” का अधिकार मिल सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मौजूदा मामले में हालांकि महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि बीमा कंपनी को पहले यह तथ्य स्थापित करना होगा कि संबंधित वाहन वास्तव में उस समय Hazardous Goods (खतरनाक सामान) का परिवहन कर रहा था। केवल लाइसेंस में Endorsement (प्राधिकरण दर्ज) न होने को आधार बनाकर मुआवजे की देनदारी से बचने का दावा पर्याप्त नहीं माना गया। इस प्रकार हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनी के बचाव के लिए आवश्यक तथ्यात्मक और कानूनी आधार पर जोर दिया। फैसला National Insurance Company Ltd. Lucknow through Assistant Manager vs. Reena Devi and Others, 2026