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कल्याण अतिरिक्त सत्र अदालत का फैसला: अंबरनाथ के निहारिका हत्याकांड में 11 साल बाद PI अजय कांबले की जांच और APP आर.आर. भोईर की पैरवी बनी अहम कड़ी, दो दोषियों को उम्रकैद

अंबरनाथ के चर्चित निहारिका हत्याकांड में करीब 11 साल के लंबे इंतजार के बाद अदालत ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 18 मार्च 2015 को लक्ष्मी छाया अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 402 में निहारिका की हत्या के बाद शुरू हुई जांच में CCTV फुटेज से लेकर चोरी के आभूषणों और अन्य सामान की बरामदगी तक कई अहम कड़ियां सामने आईं। जांच अधिकारी PI अजय पांडुरंग कांबले की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से APP आर.आर. भोईर की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने ज्योति अविनाश सालुंखे और विनयकुमार उर्फ बाबू राजकुमार मेहरा को दोषी ठहराया, जबकि तीसरी आरोपी नसीम उर्फ मुस्कान अब्दुल शेख को बरी कर दिया।

Sonali01 अक्टू. 2026, 07:04 PM IST
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कल्याण अतिरिक्त सत्र अदालत का फैसला: अंबरनाथ के निहारिका हत्याकांड में 11 साल बाद PI अजय कांबले की जांच और APP आर.आर. भोईर की पैरवी बनी अहम कड़ी, दो दोषियों को उम्रकैद


करीब 11 साल पुराने निहारिका हत्याकांड में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। 18 मार्च 2015 को अंबरनाथ के महालक्ष्मी नगर स्थित लक्ष्मी छाया अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 402 में हुई निहारिका की हत्या के मामले में कल्याण की अतिरिक्त सत्र अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। तीसरी आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मामले की जांच में PI अजय पांडुरंग कांबले द्वारा जुटाए गए CCTV, बरामदगी और फॉरेंसिक साक्ष्य तथा अभियोजन पक्ष की ओर से APP आर.आर. भोईर की पैरवी मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण रही। कल्याण की अतिरिक्त सत्र अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती वी.ए. पाटरवले ने 29 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया और 30 सितंबर 2026 को सजा का आदेश पारित किया। अदालत ने ज्योति अविनाश सालुंखे और विनयकुमार उर्फ बाबू राजकुमार मेहरा को दोषी ठहराया, जबकि नसीम उर्फ मुस्कान अब्दुल शेख को बरी कर दिया।


क्या था पूरा मामला?

मामला Sessions Case No. 124/2016 और शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन के Crime No. I-98/2015 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 18 मार्च 2015 को निहारिका घर में अकेली थी। उसकी मां शोभा स्कूल में नौकरी करती थीं, जबकि उसका भाई भी काम पर गया हुआ था। उस दिन शोभा ने आधे दिन की छुट्टी ली और करीब 10:30 बजे स्कूल से निकलीं। रास्ते में रिश्तेदारों से मिलने के बाद वह अंबरनाथ पहुंचीं। करीब 2:35 बजे अंबरनाथ पहुंचने के बाद लगभग 2:50 बजे वह लक्ष्मी छाया अपार्टमेंट स्थित अपने फ्लैट पर पहुंचीं। दरवाजा खटखटाने और घंटी बजाने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। शोभा ने अपनी चाबी से दरवाजा खोला तो घर के अंदर सामान बिखरा पड़ा था। बेड पर आभूषणों के खाली बॉक्स थे और टीवी स्टैंड खाली था। घर के दूसरे कमरे में निहारिका बेड पर पड़ी मिली। उसके गले में लाल ओढ़नी बंधी थी और हाथ-पैर सफेद ओढ़नी से बंधे हुए थे। उसकी नाक से खून निकल रहा था। पड़ोसियों की मदद से पुलिस को सूचना दी गई। इसी दिन शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।


घर से क्या-क्या गायब था?

अभियोजन के अनुसार वारदात के बाद घर से कई सोने के आभूषण और अन्य सामान गायब थे। इनमें करीब 4 तोले का सोने का मंगलसूत्र, 2.5 तोले का दूसरा मंगलसूत्र, करीब 1.5 तोले की सोने की चेन, 1 तोले का सोने का ब्रेसलेट, 1.5 तोले की सोने की चूड़ी, करीब आधे तोले की अंगूठी, सोने की बालियों की जोड़ी, सोने के मोती और पेंडेंट शामिल थे। इसके अलावा Samsung LCD TV भी गायब था। बाद में दिए गए पूरक बयान में चांदी की पायल, दो घड़ियां, बैग, तीन शर्ट, टोपी, तीन छाते, आयरन और Micromax मोबाइल फोन सहित अन्य सामान के गायब होने की जानकारी दी गई।


जांच की अहम कड़ी बनी CCTV फुटेज

मामले की जांच में PI अजय पांडुरंग कांबले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार PI कांबले Crime Branch, Ulhasnagar-4 में तैनात थे और बाद में यह केस जांच के लिए उन्हें सौंपा गया। जांच के दौरान पुलिस ने Patel Low Price Mart, Maa Sharda Developers के कार्यालय और अंबरनाथ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1, 2 और 3 से CCTV फुटेज हासिल किए। Patel Low Price Mart उसी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर था। CCTV फुटेज में एक पुरुष और एक महिला को बिल्डिंग से बाहर निकलते हुए देखा गया। पुरुष के हाथ में बेडशीट में लिपटा LCD TV था। दोनों सामान लेकर ऑटो स्टैंड की तरफ जाते दिखाई दिए। आगे के CCTV फुटेज में दोनों को अंबरनाथ रेलवे स्टेशन की ओर जाते देखा गया, जहां एक अन्य महिला उनके साथ जुड़ती दिखाई दी। अभियोजन के अनुसार मृतका के भाई अभिषेक और परिवार के अन्य सदस्यों ने CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान की। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के समर्थन में 65-B प्रमाणपत्र भी अदालत में पेश किए गए।


PI अजय कांबले की जांच में बरामदगी बनी दूसरी अहम कड़ी

CCTV के बाद पुलिस जांच में आरोपियों से जुड़ी बरामदगी को महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर पेश किया गया। आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी के दौरान तीन रेलवे टिकट, LCD TV, घड़ियां, बैग, कपड़े, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किए गए। LCD TV बेडशीट में लिपटा हुआ मिला। पुलिस के अनुसार यह वही TV था जो CCTV फुटेज में आरोपी के हाथ में दिखाई दे रहा था। मृतका के परिवार की ओर से TV की खरीद से संबंधित रसीद भी अदालत में पेश की गई। ज्योति के ठिकाने से चांदी की पायल, सोने की चेन, मोबाइल फोन, नकदी, तीन छाते और अन्य सामान बरामद किए जाने की बात जांच में सामने आई।


आरोपियों की निशानदेही पर आभूषण बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कथित खुलासे के आधार पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों की बरामदगी भी की। विनयकुमार की निशानदेही पर एक ज्वेलरी शॉप से मंगलसूत्र बरामद किया गया। वहीं अभियोजन के अनुसार नसीम ने सोने के कान के आभूषण एक सुनार को बेचने के लिए दिए थे। पुलिस ने सुनार महेश मोहनलाल सोनी के पास से ये आभूषण बरामद किए। मृतका के भाई अभिषेक ने अदालत में इन आभूषणों की पहचान की।


जांच में कपड़े, हथियार और जले हुए सामान भी सामने आए

PI कांबले की जांच में आरोपियों की निशानदेही पर कथित तौर पर अपराध में इस्तेमाल हथियारों और कपड़ों की बरामदगी भी की गई। विनयकुमार की निशानदेही पर मिले कपड़ों पर खून के निशान पाए गए। इन वस्तुओं को FSL, Kalina भेजा गया। ज्योति की निशानदेही पर कथित तौर पर जलाए गए कपड़ों के अवशेष बरामद किए गए। पुलिस ने राख और जले हुए कपड़े सहित अन्य सामग्री को भी जांच के लिए भेजा। मामले में फिंगरप्रिंट रिपोर्ट, CA रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी रिकॉर्ड पर रखा गया।


पोस्टमार्टम ने खोला हत्या का तरीका

मामले में डॉक्टर डॉ. अर्चना गुरुप्रसाद गडकरी ने निहारिका का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान गर्दन पर करीब 8 सेंटीमीटर लंबा धारदार हथियार से लगा घाव पाया गया। गले के चारों ओर ligature mark और अंदरूनी हिस्सों में hemorrhage भी पाया गया। डॉक्टर ने अदालत में बताया कि मौत गला दबाने और गले पर धारदार हथियार से लगी चोट के कारण हुए shock से हुई थी। गर्दन पर बांधी गई ओढ़नी और धारदार चोट को देखते हुए हत्या की बात मेडिकल साक्ष्य से भी सामने आई।


FIR दर्ज करने में PSO अंकुश ताकलकर की भूमिका

मामले की शुरुआती पुलिस कार्रवाई में PSO अंकुश लक्ष्मण ताकलकर की भूमिका रही। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मृतका की मां शोभा को थाने लाया गया। उनकी सूचना के आधार पर FIR दर्ज की गई। PSO ताकलकर ने अदालत में FIR दर्ज किए जाने की प्रक्रिया और उसमें दर्ज घटनाक्रम को साबित किया। इसके बाद केस की जांच आगे बढ़ी और Crime Branch के PI अजय पांडुरंग कांबले ने जांच की कमान संभाली।


21 अभियोजन गवाहों ने रखे साक्ष्य

मुकदमे के दौरान अभियोजन ने कुल 21 गवाहों की जांच की। इनमें FIR दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी, मृतका का भाई, घटनास्थल के पंच, पड़ोसी, ऑटो चालक, फोटोग्राफर, CCTV फुटेज उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति, रेलवे स्टेशन से CCTV उपलब्ध कराने वाले अधिकारी, बरामदगी के पंच, सुनार, पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर, पहचान परेड कराने वाली नायब तहसीलदार और जांच अधिकारी PI अजय कांबले शामिल थे।


अभियोजन की ओर से APP आर.आर. भोईर की मजबूत पैरवी

राज्य की ओर से APP श्रीमती आर.आर. भोईर ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने गवाहों की गवाही, CCTV फुटेज, 65-B प्रमाणपत्र, चोरी के सामान की बरामदगी, सोने के आभूषणों की बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FSL और CA रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को आधार बनाया। APP भोईर ने तर्क दिया कि मामले में कोई एक अकेला साक्ष्य नहीं, बल्कि कई परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़ते हैं। CCTV में आरोपियों की मौजूदगी, वारदात के बाद उनके पास दिखाई दिया TV, आरोपियों से जुड़ी बरामदगी, सोने के आभूषणों की बरामदगी और मेडिकल साक्ष्य को अभियोजन ने एक साथ अदालत के सामने रखा। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि आरोपियों के पास से बरामद सामान और उनकी निशानदेही पर हुई बरामदगी को मामले की परिस्थितिजन्य कड़ी के तौर पर देखा जाना चाहिए। अभियोजन ने धारा 106 Evidence Act के संदर्भ में भी आरोपियों के कब्जे में मिले सामान और उनसे संबंधित परिस्थितियों को अदालत के सामने रखा।


बचाव पक्ष ने उठाए कई सवाल

बचाव पक्ष ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने का दावा किया। बचाव पक्ष ने कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और FIR अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई थी। CCTV की विश्वसनीयता, मूल DVR पेश नहीं किए जाने, पहचान परेड में देरी और बरामदगी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कुछ महत्वपूर्ण गवाहों की जांच नहीं हुई और CCTV फुटेज अदालत में ठीक से चल नहीं पाए। फिंगरप्रिंट, DNA और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को लेकर भी बचाव पक्ष ने संदेह जताया। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरी नहीं होती।


अदालत ने दो को दोषी और एक को किया बरी

दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने ज्योति अविनाश सालुंखे और विनयकुमार उर्फ बाबू राजकुमार मेहरा को दोषी ठहराया। नसीम उर्फ मुस्कान अब्दुल शेख को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।


किस धारा में कितनी सजा?

अदालत ने ज्योति और विनयकुमार को IPC की धारा 302 सहपठित 34 के तहत उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 201/34 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 120-B/34 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 394/34 के तहत उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 392/34 के तहत 10 वर्ष का कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 449/34 के तहत उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने दोनों दोषियों को जेल में पहले से बिताई गई अवधि का लाभ CrPC की धारा 428 के तहत देने का निर्देश दिया।


मृत्युदंड की जगह उम्रकैद क्यों?

सजा पर सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों दोषियों की उम्र, उनके खिलाफ पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं होने, लंबे समय से जेल में रहने और सुधार की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने मामले की गंभीरता के बावजूद मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने जुर्माने की राशि मृतका के भाई अभिषेक को देने और मूल्यवान मुद्देमाल को अपील की अवधि पूरी होने तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।


करीब 11 साल बाद आया फैसला

18 मार्च 2015 की इस घटना के बाद पुलिस जांच, चार्जशीट, आरोप तय होने और लंबे ट्रायल के बाद 29 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया गया। इस दौरान अभियोजन ने 21 गवाहों और बड़ी संख्या में दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर रखा। अदालत के फैसले के साथ मामले में दो आरोपियों को हत्या सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा मिली, जबकि तीसरी आरोपी को बरी कर दिया गया।