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21 साल पुराने मध्यस्थता विवाद में BSNL के पक्ष में फैसला, ठाणे कोर्ट ने दावा संख्या-2 किया रद्द

ठाणे के जिला जज-3 एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.वी. घुले ने 30 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की ओर से दायर याचिका मंजूर करते हुए वर्ष 2003 के मध्यस्थता निर्णय के दावा संख्या-2 को रद्द कर दिया। मामला कल्याण में बिरला रोड जंक्शन से स्टेशन रोड जंक्शन तक केबल डक्ट निर्माण से जुड़ा था। इसमें पीवीसी पाइप की कीमत में बदलाव के आधार पर 2,14,670 रुपये की राशि की कटौती किए जाने को लेकर विवाद हुआ था।

Sonali01 अक्टू. 2026, 07:04 PM IST
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21 साल पुराने मध्यस्थता विवाद में BSNL के पक्ष में फैसला, ठाणे कोर्ट ने दावा संख्या-2 किया रद्द

ठाणे जिला न्यायालय ने करीब 21 साल पुराने आर्बिट्रल अवॉर्ड (मध्यस्थता निर्णय) से जुड़े मामले में केंद्र सरकार और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के पक्ष में फैसला सुनाया है। जिला जज-3 एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.वी. घुले ने 30 सितंबर 2026 को Arbitration and Conciliation Act, 1996 (मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996) की धारा 34 के तहत दायर याचिका को मंजूर करते हुए 13 अगस्त 2003 के आर्बिट्रल अवॉर्ड (मध्यस्थता निर्णय) के Claim No. 2 (दावा संख्या-2) को रद्द कर दिया।

यह विवाद कल्याण में Cable Duct (केबल डक्ट) निर्माण के ठेके और अनुबंध की शर्तों के तहत PVC पाइप की कीमत में बदलाव के आधार पर की गई De-escalation (कीमत में कमी के कारण राशि में समायोजन) की कटौती से जुड़ा था।

2000 में दिया गया था केबल डक्ट निर्माण का ठेका

मामले के अनुसार, वर्ष 2000 में Union of India (भारत संघ) और BSNL ने कल्याण में Birla Road Junction से Station Road Junction तक Cable Duct (केबल डक्ट) निर्माण के लिए Tender (निविदा) जारी किया था। M/s Sar-Tech Constructions को करीब 59.23 लाख रुपये की लागत से यह काम करने का ठेका मिला था। समझौते के अनुसार काम 15 सितंबर 2000 से शुरू होना था। रिकॉर्ड के मुताबिक निर्माण कार्य 30 जून 2001 को पूरा हुआ। काम पूरा होने के बाद अनुबंध की Clause 10-C (अनुबंध की धारा 10-सी) के तहत कीमतों और मजदूरी में वृद्धि या कमी के आधार पर भुगतान में समायोजन किया गया। BSNL ने PVC पाइप की कीमत में कमी यानी De-escalation (कीमत में कमी के कारण भुगतान में कटौती) के आधार पर 2,14,670 रुपये की राशि काट ली।

ठेकेदार ने आर्बिट्रेशन का रास्ता अपनाया

कटौती से असंतुष्ट होकर M/s Sar-Tech Constructions ने विवाद को Arbitration (मध्यस्थता) में ले जाने का विकल्प चुना। इसके बाद M.K. Chawala को Sole Arbitrator (एकमात्र मध्यस्थ) नियुक्त किया गया। आर्बिट्रेटर ने 13 अगस्त 2003 को अपना Award (मध्यस्थता निर्णय) पारित किया। इसमें Claim No. 1 से 4 (दावा संख्या 1 से 4) पर निर्णय दिया गया। हालांकि, केंद्र सरकार और BSNL ने केवल Claim No. 2 (दावा संख्या-2) को चुनौती दी।

PVC पाइप की कीमत की गणना बनी विवाद की वजह

मामले में मुख्य विवाद इस बात को लेकर था कि PVC पाइप की कीमत में बदलाव के आधार पर De-escalation (कीमत में कमी) की गणना किस Price Index (मूल्य सूचकांक) से की जानी चाहिए। अनुबंध के Clause 10-C (धारा 10-सी) में PVC पाइप की कीमत में बदलाव की गणना के लिए PVC Resin (पीवीसी रेजिन) के Price Index (मूल्य सूचकांक) का इस्तेमाल करने का Formula (सूत्र) निर्धारित था। BSNL का कहना था कि दोनों पक्षों ने अनुबंध में गणना का तरीका पहले ही तय कर दिया था।

वहीं, आर्बिट्रेटर ने माना कि PVC पाइप PVC Resin (पीवीसी रेजिन) से बनते हैं और निर्माण कार्य में अंतिम उत्पाद यानी PVC Pipe (पीवीसी पाइप) का इस्तेमाल होता है। इसलिए PVC Pipe के Cost Index (लागत सूचकांक) को आधार बनाया जाना चाहिए, न कि PVC Resin के Index (मूल्य सूचकांक) को।

BSNL ने कहा- आर्बिट्रेटर ने अनुबंध की शर्तों को नजरअंदाज किया

केंद्र सरकार और BSNL ने कोर्ट में दलील दी कि आर्बिट्रेटर ने अनुबंध की स्पष्ट शर्तों को नजरअंदाज किया। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के ONGC v. Saw Pipes Ltd. फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आर्बिट्रेटर को Contract (अनुबंध) की शर्तों के अनुसार विवाद का निर्णय करना होता है। BSNL के अनुसार Clause 10-C में De-escalation (कीमत में कमी) की गणना के लिए स्पष्ट Formula (सूत्र) मौजूद था और उसमें PVC Resin का Price Index (मूल्य सूचकांक) निर्धारित किया गया था। इसलिए आर्बिट्रेटर द्वारा इस प्रावधान को अस्पष्ट मानकर PVC Pipe Cost Index (पीवीसी पाइप लागत सूचकांक) को आधार बनाना अनुबंध की शर्तों के विपरीत था।

ठाणे कोर्ट ने माना- Award में ‘Patent Illegality’

जिला जज पी.वी. घुले ने रिकॉर्ड और अनुबंध की शर्तों का परीक्षण करने के बाद BSNL की दलील स्वीकार की। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों ने अनुबंध में De-escalation (कीमत में कमी) की गणना का तरीका पहले से तय किया था। कोर्ट के मुताबिक, आर्बिट्रेटर ने Clause 10-C में दिए गए Formula (सूत्र) के आधार पर Claim No. 2 (दावा संख्या-2) का फैसला करने के बजाय इस प्रावधान को अस्पष्ट माना और Contract Preferentum (अनुबंध की शर्तों के आधार पर व्याख्या का सिद्धांत) के सिद्धांत का सहारा लिया। इस तरह आर्बिट्रेटर ने अनुबंध में मौजूद सहमत शर्तों को नजरअंदाज किया। अदालत ने माना कि अनुबंध की शर्तों की अनदेखी करके दिया गया यह निष्कर्ष ‘Patent Illegality’ (स्पष्ट कानूनी त्रुटि) की श्रेणी में आता है। इसलिए Arbitration and Conciliation Act, 1996 (मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996) की धारा 34 के तहत Claim No. 2 (दावा संख्या-2) को रद्द किया जाना उचित है।

Limitation पर भी कोर्ट ने दिया फैसला

मामले में Limitation (समय-सीमा) का मुद्दा भी उठा। BSNL ने आर्बिट्रल Award (मध्यस्थता निर्णय) को चुनौती देने के लिए 15 नवंबर 2003 को Civil Judge, Senior Division, Kalyan (सिविल जज, वरिष्ठ स्तर, कल्याण) के समक्ष याचिका दाखिल की थी। बाद में पता चला कि Kalyan की अदालत के पास इस मामले की सुनवाई का Jurisdiction (क्षेत्राधिकार) नहीं था। इसके बाद BSNL ने याचिका वापस लेने और उचित अदालत में मामला दाखिल करने की अनुमति मांगी। 27 जुलाई 2017 को Kalyan कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उचित अदालत में कार्यवाही करने की स्वतंत्रता प्रदान की। ठाणे कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने मूल रूप से समय-सीमा के भीतर चुनौती दाखिल की थी, लेकिन याचिका गलत न्यायालय में दाखिल हुई थी। इसलिए वर्तमान याचिका को केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने Claim No. 2 किया रद्द

ठाणे जिला न्यायालय ने केंद्र सरकार और BSNL की Section 34 Petition (धारा 34 के तहत याचिका) मंजूर कर ली। कोर्ट ने 13 अगस्त 2003 के आर्बिट्रल Award (मध्यस्थता निर्णय) में शामिल Claim No. 2 (दावा संख्या-2) को रद्द कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा जमा कराई गई राशि को वापस निकालने की भी अनुमति दी। रिकॉर्ड के अनुसार Kalyan कोर्ट में 2,49,746 रुपये की राशि जमा थी। इस तरह कल्याण में Cable Duct (केबल डक्ट) निर्माण से जुड़े इस पुराने Contract Dispute (ठेका विवाद) में ठाणे जिला न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को आर्बिट्रेटर द्वारा Claim No. 2 (दावा संख्या-2) पर दिए गए फैसले को रद्द कर दिया।