law-order

'शोर का प्रदूषण अब बन रहा है मुसीबत': छात्रा की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, लाउड DJ पर उठे सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलरामपुर में तेज DJ और लाउडस्पीकर के बीच कक्षा-2 की छात्रा की मौत की घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए नई PIL दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ नियमों के पालन की निगरानी जरूरी है।

Sonali02 अक्टू. 2026, 07:35 PM IST
खबर शेयर करें:
'शोर का प्रदूषण अब बन रहा है मुसीबत': छात्रा की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, लाउड DJ पर उठे सवाल

इलाहाबाद: 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बलरामपुर में कक्षा-2 की छात्रा की मौत से जुड़े मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। आरोप है कि 22 सितंबर 2026 को बलरामपुर के एक स्कूल में छात्रा उस समय कक्षा में अचानक गिर गई, जब पास से तेज आवाज में लाउडस्पीकर और म्यूजिक सिस्टम के साथ जुलूस गुजर रहा था। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की पीठ ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्री को ध्वनि प्रदूषण और संबंधित वैधानिक प्रावधानों के पालन को लेकर अलग से स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।

बच्ची की मौत के कारण पर कोर्ट ने नहीं दिया कोई निष्कर्ष

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण रूप से स्पष्ट किया कि उसने बच्ची की मौत का कारण निर्धारित करने या इस घटना के लिए तेज आवाज को जिम्मेदार ठहराने संबंधी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है। कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों में सामने आए घटनाक्रम पर ध्यान दिया। बताया गया कि बलरामपुर के भगौतीगंज स्थित Divine Public School में कक्षा-2 में पढ़ने वाली छात्रा कथित तौर पर उस समय कक्षा में गिर गई, जब पास से एक जुलूस गुजर रहा था और उसमें लाउडस्पीकर तथा म्यूजिक सिस्टम तेज आवाज में बज रहे थे। पीठ ने कहा कि इस घटना और इससे जुड़े ध्वनि प्रदूषण के व्यापक मुद्दे को अलग से देखने की आवश्यकता है।

'Noise Pollution अब बन रहा है Menace'

कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण अब एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। पीठ ने यह भी कहा कि विधायिका ने Environment Protection Act, 1986 के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे को मान्यता दी है। इसके अलावा Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 भी लागू हैं। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि सड़कों पर इन नियमों का उल्लंघन रोजाना देखने को मिलता है। पीठ ने टिप्पणी की कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति अब आम हो गई है और यह सवाल उठता है कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी किसकी है तथा संबंधित अधिकारी इस संबंध में क्या कदम उठा रहे हैं।

पहले से लंबित PIL के दौरान सामने आया मामला

हाईकोर्ट एक अन्य जनहित याचिका में प्रेशर हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर के कथित दुरुपयोग से जुड़े मुद्दे की सुनवाई कर रहा था। इसी दौरान बलरामपुर की घटना सामने आई। कोर्ट ने माना कि भले ही ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कुछ पहलू पहले से लंबित मामले में सामने आ रहे हों, लेकिन बलरामपुर की घटना और उससे जुड़े व्यापक सवाल अलग कार्यवाही की मांग करते हैं। इसी के बाद पीठ ने रजिस्ट्री को 'Noise Pollution and compliance of statutory provisions in this regard by the concerned authorities' विषय पर नई स्वत: संज्ञान वाली PIL दर्ज करने का निर्देश दिया।

नियमों के पालन की नियमित निगरानी पर जोर

हाईकोर्ट ने कहा कि नई कार्यवाही में यह भी देखा जाएगा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से अधिकारी और संस्थाएं जिम्मेदार हैं तथा अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। यदि मौजूदा व्यवस्था और उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं पाए जाते हैं, तो कोर्ट वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की नियमित निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र तैयार करने पर विचार कर सकता है। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल सरकारी कार्रवाई से संभव नहीं होगा। इसके लिए आम लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। इस मामले में हाईकोर्ट अब ध्वनि प्रदूषण से जुड़े वैधानिक प्रावधानों के पालन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े व्यापक पहलुओं की जांच करेगा।