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कलकत्ता हाईकोर्ट की छत पर नमाज के बाद दुर्गा पूजा की मांग, कोर्ट ने रजिस्ट्रार से मांगी रिपोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में हाईकोर्ट की छत पर शुक्रवार की नमाज की अनुमति को लेकर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने पूछा है कि अगर वहां एक समुदाय को धार्मिक प्रार्थना की अनुमति है, तो फिर दुर्गा पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को मौके का निरीक्षण कर 12 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

Kashish Rai02 अक्टू. 2026, 07:32 PM IST
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कलकत्ता हाईकोर्ट की छत पर नमाज के बाद दुर्गा पूजा की मांग, कोर्ट ने रजिस्ट्रार से मांगी रिपोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट की छत पर धार्मिक प्रार्थना को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल होने के बाद यह मामला चर्चा में है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि अगर हाईकोर्ट की छत पर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी जा सकती है, तो फिर वहां दुर्गा पूजा करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे को धार्मिक समानता और सभी धर्मों को मिले अधिकारों से जोड़कर अदालत के सामने रखा है। मामले की सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच के सामने हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से इस मामले में जवाब मांगा। कोर्ट ने रजिस्ट्रार से यह बताने को कहा है कि हाईकोर्ट की छत पर धार्मिक प्रार्थना या किसी धार्मिक गतिविधि के आयोजन की अनुमति किस आधार पर दी जाती है और इसके लिए क्या नियम हैं।


अदालत ने केवल लिखित जवाब मांगने के बजाय रजिस्ट्रार को खुद मौके पर जाकर स्थिति देखने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट की छत का ऑन-साइट निरीक्षण करना होगा। इसके बाद उन्हें वहां की स्थिति और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े नियमों पर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी। रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा 12 अक्टूबर तय की गई है। यह जनहित याचिका संजय घोष ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म और आस्था का पालन करने का अधिकार देता है। उनका तर्क है कि अगर हाईकोर्ट परिसर में किसी एक धर्म के लोगों को धार्मिक प्रार्थना करने की अनुमति दी जा रही है, तो दूसरे धर्म के लोगों को भी उसी तरह अपनी धार्मिक गतिविधि की अनुमति मांगने का अधिकार होना चाहिए।


याचिकाकर्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कानून और संविधान समानता की बात करते हैं। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर हाईकोर्ट की छत पर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति है, तो वहां दुर्गा पूजा या भारत माता की पूजा के आयोजन को लेकर अलग नियम क्यों होने चाहिए।हालांकि, अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने इस याचिका पर दुर्गा पूजा की अनुमति देने का कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से स्थिति की जानकारी और मौके की रिपोर्ट मांगी है।  नी इस चरण में मामला अदालत के सामने विचाराधीन है और आगे का फैसला रजिस्ट्रार की रिपोर्ट तथा दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई के बाद हो सकता है। अब सभी की नजर 12 अक्टूबर को पेश होने वाली रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली सुनवाई पर है। इस रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि हाईकोर्ट की छत पर धार्मिक प्रार्थना की अनुमति किस व्यवस्था के तहत दी गई और वहां इस तरह की गतिविधियों को लेकर क्या नियम लागू हैं।