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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 9 यात्रियों की मौत पर SC ने केंद्र और यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट

यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने पूछा कि बस चालक और पंजीकृत मालिक गिरफ्तार हुए हैं या नहीं और बस को सड़क पर चलाने से पहले सभी जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

Sonali03 अक्टू. 2026, 06:37 PM IST
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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 9 यात्रियों की मौत पर SC ने केंद्र और यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) (Ministry of Road Transport and Highways ) के सचिव से पूछा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार बस चालक और पंजीकृत मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित सड़क सुरक्षा से जुड़ी याचिका S. Rajaseekaran v. Union of India में दायर अंतरिम आवेदन (Interlocutory Application) पर सुनवाई के दौरान सामने आया। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने हादसे के बाद बस की सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी।

चालक और बस मालिक की गिरफ्तारी पर रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि बस चालक और पंजीकृत मालिक के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और क्या दोनों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि सड़क पर डबल-डेकर बस चलाने से पहले उसके पंजीकृत मालिक ने सभी आवश्यक नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं। दरअसल, 23 और 24 सितंबर 2026 की दरम्यानी रात यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास एक स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे में 9 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। इस घटना के बाद बस की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठे हैं।

बस की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मांगी

आवेदन में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से हादसे की परिस्थितियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की मांग की गई है। इसमें आग लगने का कारण, बस के मालिकाना और रजिस्ट्रेशन का विवरण, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट (वाहन की तकनीकी सुरक्षा प्रमाण-पत्र), बीमा और बस में यात्रियों के लिए अधिकृत क्षमता जैसी जानकारी शामिल है।

इसके अलावा बस में किसी तरह के अनधिकृत बदलाव (Unauthorised Alterations) किए गए थे या नहीं, इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) और अन्य सुरक्षा उपकरण काम कर रहे थे या नहीं, वाहन और चालक का चालान तथा उल्लंघन का रिकॉर्ड क्या था, इसकी भी जानकारी मांगी गई है। कोर्ट के समक्ष पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और एक्सप्रेसवे अधिकारियों की प्रतिक्रिया का समय भी रिपोर्ट में शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समयबद्ध योजना की जानकारी भी मांगी गई है।

5 या उससे ज्यादा ट्रैफिक उल्लंघन वाले बस चालकों पर कार्रवाई की मांग

आवेदन में केंद्र और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश देने की मांग की गई है कि ऐसे यात्री बस चालकों की पहचान की जाए, जिनके खिलाफ संबंधित एक साल की अवधि में पांच या उससे अधिक ट्रैफिक अपराध या उल्लंघन दर्ज हैं। ऐसे चालकों के खिलाफ लाइसेंसिंग अथॉरिटी (लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण) के समक्ष कानून के अनुसार कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा पांच से अधिक बकाया चालान वाले परिवहन वाहनों को तब तक टोल प्लाजा से गुजरने से रोकने की मांग की गई है, जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता। इसके लिए ई-चालान डेटाबेस को VAHAN और FASTag से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है।

बसों की अनिवार्य सुरक्षा जांच का प्रस्ताव

आवेदन में बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट या कार्यशील स्पीड-लिमिटिंग डिवाइस (गति नियंत्रक उपकरण) वाले वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पर चलने से रोकने की मांग भी की गई है। सार्वजनिक सेवा वाहनों में VLTD (Vehicle Location Tracking Device - वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) और पैनिक बटन (आपातकालीन बटन) अनिवार्य करने की मांग की गई है। MoRTH से स्लीपर, टू-टियर स्लीपर और डबल-डेकर बसों के भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) के लिए पूरे देश में एक समान चेकलिस्ट बनाने का अनुरोध किया गया है। इस चेकलिस्ट में इमरजेंसी एग्जिट, आग का पता लगाने और बुझाने की व्यवस्था, इलेक्ट्रिकल एवं एयर-कंडीशनिंग वायरिंग, टायर, ब्रेक, बर्थ लेआउट, खतरनाक सामान और फिटनेस, परमिट तथा बीमा की वैधता की जांच शामिल करने का प्रस्ताव है। आवेदन में ऐसी बसों की समयबद्ध और जोखिम आधारित जांच कराने, जांच के दौरान जियो-टैग्ड सबूत जुटाने तथा गंभीर सुरक्षा खामियां पाए जाने पर रजिस्ट्रेशन या परमिट निलंबित करने की मांग की गई है। इसके अलावा बस चालक दल के लिए फायर-रिस्पॉन्स ट्रेनिंग, यात्रियों को सफर शुरू होने से पहले सुरक्षा संबंधी जानकारी, डिजिटल पैसेंजर मैनिफेस्ट (यात्रियों की डिजिटल सूची) और इमरजेंसी बटन को Emergency Response Support System-112 से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हाईवे और एक्सप्रेसवे प्राधिकरणों के लिए फायर और रेस्क्यू प्लान बनाने, फायर टेंडर, एंबुलेंस और बचाव उपकरण तैनात करने तथा रात के समय नियमित मॉक ड्रिल कराने की मांग भी की गई है।