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पत्नी की हत्या को गैर-इरादतन हत्या में कैसे बदला? सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट से पूछा सवाल

पत्नी की हत्या के मामले में दोषसिद्धि को कम गंभीर अपराध में बदलने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने हाईकोर्ट के साक्ष्यों के आकलन को “बेहद संक्षिप्त और लापरवाही भरा” बताते हुए पूछा कि हत्या की सजा को गैर-इरादतन हत्या में कैसे बदला गया।

Sonali10 अक्टू. 2026, 03:46 PM IST
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पत्नी की हत्या को गैर-इरादतन हत्या में कैसे बदला? सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट से पूछा सवाल

मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को पत्नी की हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 दिसंबर 2021 को आरोपी ने घरेलू विवाद के बाद पत्नी के साथ मारपीट की थी। इस दौरान उसके सिर में गंभीर चोटें आईं और 30 दिसंबर 2021 को उसकी मौत हो गई। मामले में मृतका की बहन की गवाही महत्वपूर्ण थी। अभियोजन के मुताबिक, मृतका ने अपने पिता और बहन को बताया था कि उसका पति छोटी-छोटी घरेलू बातों पर उसके साथ बेरहमी से मारपीट करता था। मृतका के इन कथित बयानों को मौखिक मृत्यु-पूर्व घोषणा (Oral Dying Declaration) के रूप में पेश किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण गवाह की गवाही पर पर्याप्त विचार क्यों नहीं किया। आरोपी की अपील पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए हत्या की दोषसिद्धि को IPC की धारा 302 से बदलकर धारा 304 भाग-II के तहत गैर-इरादतन हत्या में परिवर्तित कर दिया था। हाईकोर्ट ने इसके लिए धारा 300 के अपवाद-4 का सहारा लिया, जो निर्धारित परिस्थितियों में हत्या के अपराध को गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखने से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस कानूनी तर्क पर भी सवाल उठाया। पीठ ने कहा कि यदि मामला धारा 300 के अपवाद-4 के अंतर्गत आता भी है, तो धारा 304 भाग-II के तहत दोषसिद्धि का आधार स्पष्ट नहीं है। अदालत के अनुसार, ऐसी स्थिति में धारा 304 भाग-I लागू होने का सवाल उठ सकता था। हालांकि, पीठ ने आगे कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में मामले को धारा 300 के अपवाद-4 के तहत रखने का सवाल ही नहीं उठता। हाईकोर्ट के फैसले को ‘शॉकिंग’ यानी हैरान करने वाला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई हत्या की सजा बहाल करने पर विचार कर रही है। अदालत ने आरोपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि उसकी हत्या की दोषसिद्धि क्यों न बहाल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि बहाल करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। आरोपी का जवाब सुनने के बाद अदालत इस पर आगे निर्णय लेगी।