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₹90 हजार वेतन और लग्जरी कारों का काफिला! सचिन वाजे मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछे सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एंटीलिया बम धमकी मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर सुनवाई के दौरान उनकी महंगी कारों और कथित वसूली के आरोपों पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि करीब ₹90 हजार मासिक वेतन पाने वाले पुलिस अधिकारी के पास BMW, मर्सिडीज और वोल्वो जैसी लग्जरी कारें होना हैरान करने वाला है।

Sonali09 अक्टू. 2026, 02:40 PM IST
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₹90 हजार वेतन और लग्जरी कारों का काफिला! सचिन वाजे मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछे सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को एंटीलिया बम धमकी मामले में बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाजे की जीवनशैली पर आश्चर्य जताया। अदालत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वाजे को दी गई जमानत को चुनौती दी गई है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वाजे नियमित रूप से मर्सिडीज कार में सफर करते थे। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि यह कार वाजे की ही है। जस्टिस कुलकर्णी ने सवाल किया कि एक पुलिस अधिकारी के पास BMW, मर्सिडीज और वोल्वो जैसी महंगी कारें कैसे हो सकती हैं, जबकि उनका वेतन लगभग ₹90,000 बताया गया है। अदालत ने कहा कि वर्दीधारी व्यक्ति के खिलाफ अपराध के आरोपों पर विचार करते समय उसकी ईमानदारी, आचरण और वर्दी के प्रति निष्ठा जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वाजे कथित तौर पर मर्सिडीज से अपने कार्यालय, पुलिस आयुक्त के कार्यालय और मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास वर्षा बंगले तक जाते थे। जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि इन तथ्यों को समझने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि NIA इन पहलुओं के जरिए मामले को कथित जबरन वसूली (Extortion) से जोड़ रही है। सुनवाई के दौरान NIA ने वाजे के पुराने आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया। ASG अनिल सिंह ने दलील दी कि वाजे पहले हिरासत में मौत के मामले में भी शामिल रहे हैं और उन पर सबूत तथा CCTV फुटेज नष्ट करने के आरोप हैं। एजेंसी ने आशंका जताई कि रिहा होने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। NIA के मुताबिक, कुछ गवाहों की पहचान गोपनीय रखी गई है, जिससे मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होने का खतरा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि विशेष अदालत ने वाजे की जमानत पर पहले ही कड़ी शर्तें लगाई हैं। इनमें मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक मुंबई और कुछ अन्य जिलों से बाहर रहने की शर्त भी शामिल है। जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आरोप भी तय किए जा चुके हैं। ऐसे में अदालत ने NIA से पूछा कि इतनी सख्त शर्तों के बावजूद वाजे की रिहाई से एजेंसी के मुकदमे पर क्या प्रतिकूल असर पड़ेगा। सुनवाई के दौरान NIA ने वाजे के पुलिस अधिकारी होने और उनकी कथित गतिविधियों को लेकर अपनी आपत्तियां जारी रखीं। उपलब्ध रिपोर्ट के इस अंश में हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय या जमानत पर अपील के नतीजे का उल्लेख नहीं है।