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दक्षिण मुंबई की सफाई दिखाकर नहीं चलेगा काम! बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC को सभी 24 वार्डों पर घेरा
मुंबई की सड़कों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर कचरे के ढेर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि दक्षिण मुंबई, वर्ली और नरीमन पॉइंट जैसे इलाकों की सफाई से पूरे शहर को स्वच्छ नहीं माना जा सकता। अदालत ने सभी 24 वार्डों में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा मांगा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने 7 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान मुंबई में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की स्थिति पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि शहर में जगह-जगह कचरा फेंकने की समस्या अब भी जारी है, जबकि BMC पहले सभी 24 वार्डों में स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के लिए विस्तृत योजना पेश कर चुकी है। अदालत ने पश्चिमी उपनगरों की स्थिति का भी उल्लेख किया। न्यायाधीशों ने बताया कि पिछले सप्ताह उत्तन जाते समय उन्होंने पश्चिमी उपनगरों में सड़कों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर कचरा तथा गंदगी देखी थी। अदालत ने जोगेश्वरी और मालाड जैसे इलाकों में स्वच्छता की स्थिति पर विशेष चिंता जताई।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छता की चिंता अदालत की प्राथमिकता है। अदालत के अनुसार, सड़कों पर कचरा फेंकने और उसके उचित निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। केवल कुछ चुनिंदा इलाकों में सफाई बनाए रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता के मानकों का पालन होना चाहिए।
सभी 24 वार्डों की सफाई का मांगा विस्तृत ब्योरा
अदालत ने BMC को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि मुंबई के प्रत्येक वार्ड में कचरा सड़कों, पहाड़ी ढलानों, फुटपाथों और खुले स्थानों पर फेंकने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने वार्ड स्तर पर उठाए गए कदमों का स्पष्ट विवरण मांगा है, ताकि सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
खंडपीठ ने यह भी सवाल उठाया कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शुरू किए गए स्वच्छता अभियान के तहत महानगरपालिका ने क्या कार्रवाई की। अदालत ने केवल योजनाओं और दावों के बजाय जमीन पर दिखाई देने वाले सुधार पर जोर दिया।
सफाई और बीमारियों के बीच संबंध पर भी ध्यान
अदालत ने नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल सहित अन्य महानगरपालिका और सरकारी अस्पतालों से आंकड़े पेश करने को कहा है। इन आंकड़ों में संक्रामक बीमारियों, डेंगू, मलेरिया और एच1एन1 से पीड़ित होकर भर्ती हुए मरीजों की जानकारी मांगी गई है। इससे अदालत शहर की स्वच्छता व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति का व्यापक आकलन करना चाहती है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दायरे को भी बढ़ाया है। शुरुआत में याचिका कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड की सुविधा से संबंधित थी, लेकिन अब इसमें मुंबई के सभी वार्डों में स्वास्थ्य और स्वच्छता की निगरानी का मुद्दा भी शामिल किया गया है। अदालत ने BMC से वार्डवार कार्रवाई का विवरण और अस्पतालों के आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि मुंबई की सफाई व्यवस्था का आकलन केवल दक्षिण मुंबई जैसे बेहतर रखरखाव वाले इलाकों के आधार पर नहीं किया जा सकता। महानगरपालिका को शहर के प्रत्येक वार्ड में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का जवाब अदालत के सामने रखना होगा।
