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‘बालिका वधू’ फेम अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी आत्महत्या केस में राहुल राज सिंह आरोपमुक्त, बॉम्बे HC ने सेशन कोर्ट का आदेश पलटा

टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ से मशहूर हुईं अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की आत्महत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह को बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि राहुल की कथित प्रताड़ना के कारण प्रत्युषा ने आत्महत्या की थी। इसी आधार पर अदालत ने राहुल को मामले से आरोपमुक्त कर दिया।

Sonali10 अक्टू. 2026, 03:46 PM IST
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‘बालिका वधू’ फेम अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी आत्महत्या केस में राहुल राज सिंह आरोपमुक्त, बॉम्बे HC ने सेशन कोर्ट का आदेश पलटा

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस शिवकुमार डिगे ने 30 सितंबर 2026 को दिए आदेश में राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त किया। यह आदेश 8 अक्टूबर को अपलोड किया गया। अदालत ने कहा कि प्रत्युषा के परिवार ने राहुल पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि राहुल ने प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाया या प्रेरित किया था।

1 अप्रैल 2016 को फ्लैट में मृत मिली थीं प्रत्युषा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 1 अप्रैल 2016 को प्रत्युषा बनर्जी मुंबई के गोरेगांव पश्चिम स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे से लटकी मिली थीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। प्रत्युषा के माता-पिता का आरोप था कि राहुल राज सिंह के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते समय उनकी बेटी को प्रताड़ित किया जाता था। परिवार का दावा था कि लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर प्रत्युषा ने आत्महत्या की। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जो इन आरोपों की पुष्टि करता हो।

आत्महत्या से पहले राहुल से हुई थी फोन पर बात

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आत्महत्या से पहले प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई आखिरी फोन कॉल का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, फोन पर राहुल प्रत्युषा से कोई भी चरम कदम नहीं उठाने और उसके पहुंचने तक इंतजार करने की गुहार लगा रहा था। इस दौरान प्रत्युषा अपनी जिंदगी से परेशान होने की बात कह रही थीं। अदालत ने यह भी कहा कि घटना के बाद राहुल अन्य लोगों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचा और प्रत्युषा को बचाने के लिए अस्पताल ले गया। घटना के बाद सदमे के कारण राहुल को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जस्टिस डिगे ने यह भी ध्यान दिया कि लगभग एक साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान प्रत्युषा ने राहुल के खिलाफ प्रताड़ना की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

सेशन कोर्ट ने पहले खारिज की थी याचिका

राहुल राज सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जुलाई 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दी थी। अप्रैल 2018 में बंगुर नगर पुलिस ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद राहुल ने मामले से आरोपमुक्त किए जाने की मांग की। हालांकि, सेशन कोर्ट ने 14 अगस्त 2023 को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सेशन कोर्ट ने प्रत्युषा के दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बयानों का उल्लेख करते हुए दोनों के रिश्ते में कथित हिंसा और दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों को महत्वपूर्ण माना था। इसके बाद राहुल ने सेशन कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद सेशन कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त कर दिया।

राहुल की ओर से किसने पैरवी की?

राहुल राज सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अधिवक्ता श्रेयांश मिथारे, पूजा शर्मा, अविनाश कोरी और शोभित देसाई के साथ पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक एस.आर. अगरकर पेश हुए। इस फैसले में हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि राहुल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता। अदालत का आदेश राहुल को इस मामले में आरोपों से मुक्त करता है।