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त्योहारों में तेज रोशनी पर रहेगी नजर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1998 के आदेश को लागू करने को कहा
मुंबई और ठाणे में रात के समय तेज रोशनी से होने वाले प्रकाश प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को रात 11 बजे के बाद नियोन लाइट के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े 1998 के आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। खास तौर पर आगामी त्योहारों के दौरान इस आदेश के पालन पर जोर दिया गया है।

मुंबई:
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ दक्षिण मुंबई के निवासी नीलेश देसाई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में महाराष्ट्र के क्षेत्रों को ‘डार्क स्काई फ्रेंडली’ यानी कम प्रकाश प्रदूषण वाले क्षेत्र बनाने और रात में अत्यधिक तेज रोशनी के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नियम तैयार करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोनिता भट्टाचार्य ने अधिवक्ता सजल खान की सहायता से अदालत में दलील दी कि मुंबई और ठाणे में स्टेडियम, जिमखाना, विवाह स्थलों, खुले मैदानों और बड़े होर्डिंग पर लगाई जाने वाली तेज रोशनी स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। याचिका के अनुसार, हाई-इंटेंसिटी फ्लडलाइट्स यानी अत्यधिक तेज रोशनी वाली लाइटों की चमक आसपास के आवासीय इलाकों तक पहुंचती है। इससे लोगों की नींद और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। याचिका में वर्ष 1998 के अश्विन जजाई बनाम मुंबई महानगरपालिका (MCGM) मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला दिया गया। उस समय अदालत ने संबंधित अधिकारियों को रात 11 बजे के बाद मुंबई में नियोन लाइट का इस्तेमाल रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुराने आदेश के बावजूद प्रकाश प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है। याचिका में इस मुद्दे पर गठित हाई पावर कमेटी यानी उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक कृत्रिम रोशनी से अनिद्रा और अन्य शारीरिक व मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। याचिकाकर्ता ने मुंबई कलेक्टर के 9 जनवरी 2018 के आदेश और 12 फरवरी 2018 के आदेश का भी हवाला देते हुए कहा कि प्रकाश प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उचित नियम बनाने की आवश्यकता पहले भी सामने आ चुकी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित सरकारी विभागों और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने प्रकाश प्रदूषण रोकने और पहले जारी निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि रात में अनावश्यक रूप से फैलने वाली तेज रोशनी का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पेड़-पौधों और वन्यजीवों पर भी पड़ सकता है। याचिका में फ्लडलाइट्स के इस्तेमाल को नियंत्रित करने और रोशनी के अनावश्यक फैलाव को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए वर्ष 1998 के आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने विशेष रूप से आगामी त्योहारों के दौरान इसके पालन पर जोर दिया, ताकि रात में तेज रोशनी से होने वाली परेशानी को कम किया जा सके।
