law-order
ड्रग्स यूजर्स को अपराधी मानकर दंडित करने के बजाय सप्लाई चेन तोड़ने पर ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ड्रग्स इस्तेमाल करने वालों को केवल अपराधी मानकर जेल में डालने के बजाय नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन तोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत अभियोजन कार्रवाई रद्द करते हुए चेताया कि सुनवाई पूरी होने से पहले जेल में रखने से कथित ड्रग्स यूजर्स नशे के कारोबार से और गहराई से जुड़ सकते हैं।

यह मामला संजना भास्करन बनाम तेलंगाना राज्य एवं अन्य (Sanjana Bhaskaran v. State of Telangana & Anr.) से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला को एक शैक्षणिक संस्थान यानी कॉलेज के पास दो कथित गांजा विक्रेताओं से एक पैकेट लेते हुए पकड़े जाने का आरोप था। पुलिस ने इस मामले में महिला को चौथे आरोपी के रूप में शामिल किया था। अभियोजन के मुताबिक, महिला कॉलेज के पास मौजूद दो लोगों के पास पहुंची और उनसे गांजे से भरा एक पैकेट लिया। आरोप था कि उसने उस पैकेट को अपने बैग में रख लिया। पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया। दोनों कथित विक्रेताओं के पास उनकी स्कूटी में गांजे की अधिक मात्रा होने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, महिला के खिलाफ मामले में एक अहम तथ्य सामने आया। पुलिस अधिकारियों के बयानों के अनुसार, महिला या उसके बैग से कोई भी प्रतिबंधित नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। इसके बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई मुख्य रूप से सह-आरोपियों के बयानों और उसके कथित इकबालिया बयान पर आधारित थी। महिला ने इस अभियोजन कार्रवाई को चुनौती दी और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की कार्रवाई?
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले के तथ्यों पर विचार किया। कोर्ट ने पाया कि महिला के पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ था और उसके खिलाफ अभियोजन का आधार सह-आरोपियों के बयान तथा कथित स्वीकारोक्ति थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे इकबालिया बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जब महिला से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की स्थिति ऐसी थी, तो उसके खिलाफ अभियोजन जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ NDPS Act के तहत चल रही अभियोजन कार्रवाई रद्द कर दी और उसकी अपील स्वीकार कर ली।
'ड्रग्स यूजर्स भी सप्लाई चेन के शिकार हो सकते हैं'
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों से निपटने के तरीके पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन के अंतिम स्तर पर मौजूद लोगों को केवल अपराधी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। कई परिस्थितियों में वे खुद भी इस व्यवस्था के शिकार हो सकते हैं। कोर्ट ने आगाह किया कि ऐसे लोगों पर मुकदमा चलाना और सुनवाई पूरी होने से पहले उन्हें जेल में रखना उलटा असर डाल सकता है। जेल में दूसरे आरोपियों के साथ संपर्क और संबंध बनने के कारण वे नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन में और आगे शामिल हो सकते हैं। पीठ ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ अभियोजन का एक नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। मुकदमे के दौरान जेल में रहने से वे ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं, जिनके कारण उनके नशे के कारोबार में शामिल होने का खतरा बढ़ जाए। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, कानून लागू करने वाली एजेंसियों का मुख्य ध्यान नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने और उनकी सप्लाई चेन को तोड़ने पर होना चाहिए, न कि केवल उनका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को दंडित करने पर।
सप्लायर और तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई पर जोर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते समय आरोपों और उपलब्ध सबूतों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। नशे के कारोबार की आपूर्ति व्यवस्था को तोड़ना और नशीले पदार्थों की उपलब्धता कम करना भी कानून प्रवर्तन का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने सभी ड्रग्स इस्तेमाल करने वालों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने का कोई सामान्य नियम नहीं बनाया। इस मामले में महिला के खिलाफ कार्रवाई उसके मामले के विशिष्ट तथ्यों, बरामदगी नहीं होने और अभियोजन के आधार को देखते हुए रद्द की गई। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने महिला की अपील स्वीकार कर ली और उसके खिलाफ अभियोजन जारी रखने को अनुचित माना।
