law-order
गोवा में आवारा कुत्तों और मवेशियों की संख्या का रिकॉर्ड जमा करें, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दी 22 अक्टूबर तक की मोहलत
गोवा में आवारा कुत्तों, पालतू कुत्तों और आवारा मवेशियों की संख्या का रिकॉर्ड जमा नहीं करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय अधिकारियों को अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी है। कोर्ट ने पंचायत सचिवों, नगर परिषदों के मुख्य अधिकारियों और पणजी नगर निगम के आयुक्त को 22 अक्टूबर 2026 तक संबंधित डेटा जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से संबंधित निर्देशों के अनुपालन को लेकर शुरू की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu Writ Petition) से जुड़ा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित एस. जामसंडेकर की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि 10 सितंबर 2026 को दिए गए अपने पिछले आदेश के बावजूद संबंधित स्थानीय प्रशासन ने आवारा कुत्तों, पालतू कुत्तों और आवारा मवेशियों से जुड़ा डेटा संकलित कर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा निदेशक को नहीं सौंपा है। अदालत ने कहा कि पंचायत सचिवों, नगर परिषदों के मुख्य अधिकारियों और पणजी नगर निगम के आयुक्त ने अब तक डेटा संकलन और उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाने के निर्देशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट के अनुसार, यह काम 22 अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाना था। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से आवश्यक जानकारी जमा नहीं की गई। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित अधिकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर डेटा भेजें और रिपोर्ट की प्रतियां कोर्ट में भी दाखिल करें।
पालतू कुत्तों की संख्या, लिंग और नसबंदी का ब्योरा मांगा
कोर्ट ने पालतू कुत्तों के संबंध में भी जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर ध्यान दिलाया। अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड में पालतू कुत्तों की संख्या, उनके लिंग और नसबंदी की स्थिति का विवरण तैयार करना था। इसके अलावा, अदालत ने घर-घर चलाए जाने वाले जागरूकता अभियानों से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी है। इन अभियानों का उद्देश्य कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, प्रतिरक्षण, कृमिनाशक दवाओं के इस्तेमाल, कचरा प्रबंधन, जिम्मेदारी से भोजन देने और आवारा कुत्तों को गोद लेने के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि इन निर्देशों के पालन के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अगली सुनवाई के दौरान संबंधित विभागों को अपनी कार्रवाई का विवरण रिकॉर्ड पर रखना होगा।
आवारा मवेशियों का वार्डवार डेटा भी जमा करने का आदेश
आवारा मवेशियों को लेकर भी कोर्ट ने स्थानीय निकायों को वार्डवार डेटा तैयार करने और उसकी अलग-अलग सूची पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा निदेशक को भेजने का निर्देश दिया। अधिकारियों को इस संबंध में पूरी जानकारी संकलित कर अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करना गंभीर लापरवाही है और जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
26 अक्टूबर को अगली सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित पंचायत सचिवों, नगर परिषदों के मुख्य अधिकारियों और पणजी नगर निगम के आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना करने या अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक संबंधित अधिकारियों को डेटा जमा करने और अदालत के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करनी होगी।
