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कंगना रनौत की ‘Queen Full Power’ पर रोक लगाने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार, Phantom Studios का कॉपीराइट दावा खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना रनौत की फिल्म ‘Queen Full Power’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों फिल्मों की कहानी में समानता का ठोस सबूत नहीं है और ‘Queen’ शब्द पर किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं हो सकता।

Sonali15 अक्टू. 2026, 04:48 PM IST
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कंगना रनौत की ‘Queen Full Power’ पर रोक लगाने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार, Phantom Studios का कॉपीराइट दावा खारिज

Phantom Studios ने बॉम्बे हाईकोर्ट में फिल्म के सह-निर्माता Jiostar India Pvt. Ltd. और Trigger Happy Entertainment के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। बाद में Digital 18 Media Pvt. Ltd. को भी मामले में पक्षकार बनाया गया। कंपनी का कहना था कि मूल फिल्म ‘Queen’ के अधिकारों से जुड़े सह-निर्माण समझौते के तहत किसी भी सीक्वल या उससे निकली दूसरी फिल्म के निर्माण के लिए उसकी सहमति जरूरी है। Phantom Studios ने अदालत से ‘Queen Full Power’ के निर्माण और रिलीज पर रोक लगाने के साथ ‘Queen Full Power’, ‘Queen Forever’ और ‘Queen 2’ जैसे नामों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कंपनी ने 253.55 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी किया।

दोनों फिल्मों की कहानी अलग: हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं की ओर से अदालत को ‘Queen Full Power’ की कहानी का सारांश दिखाया गया। Phantom Studios ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने कहा कि कंपनी के पास फिल्म के मूल कथानक या प्रमुख तत्वों की नकल किए जाने का कोई ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने दोनों फिल्मों की कहानियों की तुलना करते हुए कहा कि मूल फिल्म में एक युवा पंजाबी महिला के यूरोप में अकेले हनीमून पर जाने की कहानी है, जबकि नई फिल्म एक विवाहित मराठी महिला के अपहरण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है, जिससे प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि नई फिल्म ने ‘Queen’ की कहानी के महत्वपूर्ण तत्वों या उसकी संरचना को अपनाया है।

‘Queen’ शब्द पर किसी कंपनी का एकाधिकार नहीं

Phantom Studios ने दलील दी कि मूल फिल्म की लोकप्रियता के कारण ‘Queen’ शीर्षक ने विशेष पहचान हासिल कर ली है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता किसी फिल्म के शीर्षक पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि शीर्षक ने समय के साथ विशिष्ट पहचान और समर्पित प्रशंसक वर्ग विकसित किया है। अदालत ने कहा कि ‘Queen’ एक सामान्य और प्रशंसात्मक अर्थ वाला शब्द है, जिसका इस्तेमाल कई फिल्मों और ओटीटी शीर्षकों में किया गया है। यदि कंपनी का दावा स्वीकार कर लिया जाए, तो दूसरे निर्माता अपनी फिल्मों के नाम में इस शब्द का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि Phantom Studios के पास ‘Queen’ नाम का पंजीकृत ट्रेडमार्क नहीं है और इस शीर्षक पर आधारित कोई स्थापित फिल्म फ्रेंचाइजी भी नहीं है।

महिला सशक्तिकरण की थीम पर भी एकाधिकार नहीं

अदालत ने कहा कि महिला के आत्मविश्वास, शक्ति की पहचान और सशक्तिकरण की थीम पर कोई एक निर्माता एकाधिकार का दावा नहीं कर सकता। केवल शीर्षक, थीम और मुख्य अभिनेत्री का एक होना भी विशेष अधिकार स्थापित नहीं करता, खासकर जब दोनों फिल्मों की कहानियों में कोई ठोस संबंध नहीं मिला हो। कंगना रनौत की लोकप्रियता और व्यक्तिगत पहचान पर भी Phantom Studios एकाधिकार नहीं जता सकती।

अंतरिम राहत की मांग खारिज

अनुबंध के उल्लंघन के आरोप पर अदालत ने Jiostar की समझौते में भूमिका से जुड़े सवाल को अंतिम सुनवाई के लिए खुला रखा। हालांकि, नई फिल्म को मूल फिल्म की व्युत्पन्न रचना साबित नहीं किए जाने के कारण तत्काल रोक लगाने का आधार नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि फिल्म की मुख्य शूटिंग पूरी हो चुकी है और Phantom Studios हर्जाने की मांग कर सकती है। इसके बाद अदालत ने फिल्म पर अंतरिम रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया हैं और मुकदमे की अंतिम सुनवाई को प्रभावित नहीं करेंगी।