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महिला की तलाशी पुरुष पुलिसकर्मियों के सामने लेना NDPS एक्ट का उल्लंघन, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी जमानत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने NDPS एक्ट के एक मामले में आरोपी महिला को जमानत देते हुए कहा कि महिला की तलाशी पुरुष पुलिसकर्मियों और पुरुष पंच की मौजूदगी में नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया को कानून के अनुरूप नहीं पाया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने NDPS एक्ट के एक मामले में आरोपी महिला को जमानत देते हुए कहा कि महिला की तलाशी पुरुष पुलिसकर्मियों और पुरुष पंच की मौजूदगी में नहीं ली जानी चाहिए। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया को कानून के अनुरूप नहीं पाया। न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की पीठ जयबुन मोहम्मद शेख बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामला NDPS एक्ट, 1985 की धारा 8(c), 21(b), 22(c) और 29 के तहत दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी महिला और एक अन्य आरोपी को बेल बाजार इलाके में पकड़ा गया था। तलाशी के दौरान दूसरे आरोपी से कथित तौर पर 111 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि महिला के पास मौजूद पर्स से 57 ग्राम मेफेड्रोन (MD) मिलने का दावा किया गया। महिला की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि तलाशी के दौरान NDPS एक्ट की धारा 50(4) का पालन नहीं किया गया। हालांकि, तलाशी एक महिला पुलिस हेड कांस्टेबल ने ली थी, लेकिन उस समय पुरुष पुलिस इंस्पेक्टर और पुरुष पंच गवाह भी मौजूद थे। कोर्ट ने घटनास्थल के पंचनामे का निरीक्षण किया। इसमें पाया गया कि महिला और उसके पर्स की तलाशी पुरुष पुलिस इंस्पेक्टर तथा पुरुष पंच गवाह की मौजूदगी में ली गई थी। कोर्ट ने कहा कि महिला की तलाशी एकांत में और पुरुषों की मौजूदगी से अलग होकर होनी चाहिए। केवल महिला पुलिसकर्मी से तलाशी करवाना इस कानूनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS एक्ट की धारा 50(4) के तहत महिला की तलाशी से जुड़ी यह शर्त अनिवार्य है। तलाशी के समय महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं होने का आधार लेकर भी इस आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकलता है कि महिला से प्रतिबंधित पदार्थ की बरामदगी की प्रक्रिया पुरुष पुलिस अधिकारी और पुरुष पंच की मौजूदगी के कारण कानूनी रूप से प्रभावित हुई। इससे यह अनुमान लगाने का आधार मिलता है कि आरोपी महिला कथित अपराध की दोषी नहीं हो सकती है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि महिला का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने माना कि NDPS एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत पर लागू प्रतिबंध उसके मामले में आड़े नहीं आते। इसके बाद हाईकोर्ट ने महिला को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के एक या दो जमानतदारों के साथ रिहा करने का निर्देश दिया। यह आदेश जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया है। मामले में कोर्ट की टिप्पणियां प्रथम दृष्टया आकलन पर आधारित हैं।
