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पेशी से छूट मांगकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बिना कपड़ों के लेटा दिखा पक्षकार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान एक पक्षकार बिना कपड़े पहने बिस्तर पर लेटा हुआ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ गया, जिस पर जस्टिस गौरी गोडसे ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे VC से बाहर जाने का निर्देश दिया। टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने संपत्तियों का पूरा ब्योरा दाखिल नहीं करने पर भी सख्ती दिखाई और 21 अक्टूबर तक अंतिम मौका देते हुए आदेश का पालन नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी।

यह मामला टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से हीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ शुरू की गई निष्पादन कार्यवाही से जुड़ा है। बॉम्बे हाईकोर्ट में चैंबर समन्स नंबर 1411/2018 और कमर्शियल एग्जीक्यूशन एप्लिकेशन नंबर 160/2019 पर 12 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादी नंबर 2 की ओर से व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट का आवेदन दिया गया। अदालत को बताया गया कि उनकी तबीयत खराब है और उन्हें यात्रा नहीं करने की चिकित्सकीय सलाह दी गई है। आवेदन के साथ एक आयुर्वेदिक केंद्र का मेडिकल सर्टिफिकेट भी पेश किया गया था। हालांकि, छूट मांगने के बावजूद प्रतिवादी नंबर 2 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुआ। अदालत ने रिकॉर्ड किया कि वह बिस्तर पर बिना कपड़ों के लेटा हुआ दिखाई दे रहा था। कोर्ट ने उसके व्यवहार की निंदा करते हुए उसे VC से बाहर जाने का निर्देश दिया। प्रतिवादी के वकील ने इस आचरण के लिए माफी मांगी। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगने के लिए पक्षकारों को इस तरह अदालत के सामने उपस्थित नहीं होना चाहिए। हालांकि, पर्याप्त और उचित मेडिकल प्रमाणपत्र नहीं होने के बावजूद कोर्ट ने उस दिन के लिए प्रतिवादी नंबर 2 को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी। अगली सुनवाई पर उसे स्वयं उपस्थित होना होगा या यात्रा करने में चिकित्सकीय असमर्थता होने पर उचित मेडिकल दस्तावेज जमा करने होंगे।
संपत्तियों का पूरा खुलासा नहीं करने पर कोर्ट नाराज
मामले में अदालत ने प्रतिवादी नंबर 2 की ओर से दाखिल हलफनामों में संपत्तियों का पूरा विवरण नहीं दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने पहले 16 जनवरी और 4 फरवरी 2026 के आदेशों में सभी चल-अचल संपत्तियों और परिसंपत्तियों का खुलासा करने का निर्देश दिया था। प्रतिवादी की ओर से दावा किया गया कि दिसंबर 2025 में दाखिल हलफनामे और 6 अक्टूबर 2026 के हलफनामे में जरूरी जानकारी दी गई है। वहीं, टाटा कैपिटल के वकील ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का अब तक पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। जस्टिस गौरी गोडसे ने हलफनामों की जांच के बाद कहा कि इनमें सभी संपत्तियों का स्पष्ट और पूरा विवरण नहीं है। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि प्रतिवादी के नाम पर कोई ऐसी दूसरी संपत्ति नहीं है, जिसे कुर्क करके बेचा जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्तियों का खुलासा करना जरूरी है, चाहे वे किसी दायित्व के तहत बंधक हों या उससे मुक्त हों।
21 अक्टूबर तक अंतिम मौका
कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 2 को 21 अक्टूबर 2026 तक नया हलफनामा दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया। इसमें 1 अप्रैल 2016 से सभी संपत्तियों, आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट, चल-अचल परिसंपत्तियों और मिलने वाली रकम का दस्तावेजों सहित पूरा विवरण देना होगा। अदालत ने चेतावनी दी कि समयसीमा में सही जानकारी नहीं देने पर सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के तहत अवॉर्ड के निष्पादन के लिए आगे के निर्देशों पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी।
