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कर्मचारियों को सैलरी नहीं देना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

कर्मचारियों को महीनों तक वेतन न देना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिंहगढ़ टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी के मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वेतन कर्मचारियों की आजीविका का बुनियादी आधार है। मामले में 772 पूर्व कर्मचारियों का करीब 21 करोड़ रुपये वेतन बकाया बताया गया।

Sonali16 अक्टू. 2026, 03:55 PM IST
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कर्मचारियों को सैलरी नहीं देना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुंबई:

 बॉम्बे हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं करने को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय तक वेतन से वंचित रखना गंभीर मामला है, क्योंकि वेतन उनकी आजीविका और जीवनयापन का बुनियादी आधार है। यह मामला सिंहगढ़ टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी (STES) के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बकाया वेतन से जुड़ा है। मामले में 772 पूर्व कर्मचारियों का करीब 21 करोड़ रुपये वेतन बकाया होने की बात सामने आई।

772 पूर्व कर्मचारियों का वेतन बकाया

जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ कर्मचारियों की याचिकाओं और अदालत के पुराने आदेशों का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत को बताया गया कि 19 रिट याचिकाओं और उनसे संबंधित अवमानना याचिकाओं में 772 पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। इनमें इस्तीफा देने वाले और नौकरी से हटाए गए कर्मचारी भी हैं। इन कर्मचारियों का लगभग 21 करोड़ रुपये वेतन बकाया बताया गया। सुनवाई के दौरान सिंहगढ़ टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी की ओर से पेश वकील ने आश्वासन दिया कि बकाया राशि का भुगतान 31 अगस्त 2026 तक कर दिया जाएगा। अदालत ने संस्थान को हलफनामा दाखिल कर भुगतान के संबंध में जानकारी देने का निर्देश दिया।

22 महीने से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा

सुनवाई में यह भी बताया गया कि संस्थान में काम कर रहे कुछ मौजूदा कर्मचारियों को 22 महीने से अधिक समय से वेतन नहीं मिला है। इस पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई और संयुक्त शिक्षा निदेशक (Joint Director of Education) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कर्मचारियों की आजीविका से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया। पीठ के समक्ष ऐसे कर्मचारियों की स्थिति भी रखी गई, जिन्हें अपने बकाया वेतन के लिए अदालत का रुख करना पड़ा।

कर्मचारियों की आत्महत्या के दावों पर भी चिंता

सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से यह दावा भी किया गया कि वेतन नहीं मिलने के कारण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों समेत कुछ कर्मचारियों ने आत्महत्या की। अदालत ने इन दावों पर दुख जताया। साथ ही, इस संबंध में आपराधिक कार्यवाही लंबित होने की बात भी सामने आई। इन दावों को अदालत में उठाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

संविधान के तीन अनुच्छेदों का उल्लेख

बॉम्बे हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लेख करते हुए वेतन भुगतान के महत्व को रेखांकित किया। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता, अनुच्छेद 19(1)(g) पेशा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है। अदालत की टिप्पणी का मुख्य आधार यह था कि वेतन कर्मचारियों के जीवनयापन से सीधे जुड़ा है और लंबे समय तक उसका भुगतान नहीं होना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। मामले में आगे की सुनवाई होनी थी। इसलिए अदालत की टिप्पणियों को अंतिम निर्णय या सभी कर्मचारियों को बकाया भुगतान हो जाने की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।