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डोंबिवली में अवैध निर्माण का आरोप, गवाह नदारद; नंदकिशोर परब और सूर्यकांत मालकर दोषमुक्त
डोंबिवली में कथित अवैध निर्माण का मामला अदालत पहुंचा, लेकिन आरोप साबित करने के लिए जरूरी गवाह ही पेश नहीं हुए! कल्याण JMFC कोर्ट ने नंदू उर्फ नंदकिशोर परब और सूर्यकांत मालकर को MRTP एक्ट की धारा 52(1) के तहत दोषमुक्त कर दिया। 7 अक्टूबर 2026 के फैसले में अदालत ने अभियोजन के सबूतों को नाकाफी पाया—आरोप गंभीर थे, लेकिन उन्हें साबित करने की जिम्मेदारी निभाने में अभियोजन नाकाम रहा।

मामला डोंबिवली पूर्व के MIDC क्षेत्र स्थित प्लॉट नंबर O-3 का है, जहां बिना अनुमति दो इमारतें और दुकानें बनाने का आरोप नंदू उर्फ नंदकिशोर परब और सूर्यकांत मालकर पर लगा था। MIDC के उप अभियंता की शिकायत पर 2013 में मनपाड़ा पुलिस ने केस दर्ज किया, सबूतों की कमी के चलते कल्याण JMFC कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, MIDC में उप अभियंता के रूप में कार्यरत तुलसीराम धोंडू बडगुजर को क्षेत्र में अवैध निर्माण पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने डोंबिवली पूर्व के MIDC क्षेत्र में प्लॉट नंबर O-3 पर कथित अवैध निर्माण देखा और मौके का पंचनामा तैयार किया। आरोप था कि संबंधित व्यक्तियों को निर्माण की अधिकृत अनुमति दिखाने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन वे अनुमति पेश नहीं कर सके। इसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को मनपाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने FIR नंबर II-42/2013 दर्ज कर जांच की और दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। मामला वर्ष 2014 में अदालत में पेश हुआ था।
गवाह की गवाही पर अदालत ने जताया संदेह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से केवल एक गवाह, पंच गवाह रवि प्रकाश खरवार (PW-1), की गवाही दर्ज की गई। गवाह ने बताया कि 31 अक्टूबर 2013 को मनपाड़ा पुलिस ने उसे पंचनामा तैयार करने के लिए बुलाया था। हालांकि, अदालत ने पंचनामा देखने के बाद पाया कि दस्तावेज पुलिस अधिकारी के बजाय शिकायतकर्ता द्वारा तैयार किया गया था। इस आधार पर अदालत ने गवाह के बयान को विश्वसनीय नहीं माना। अदालत ने यह भी पाया कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष शिकायतकर्ता, प्रत्यक्षदर्शियों और जांच अधिकारी को अदालत में पेश करने में विफल रहा। इसके चलते अभियोजन पक्ष अपने दस्तावेजों और आरोपों को साक्ष्य के माध्यम से प्रमाणित नहीं कर सका।
MRTP एक्ट के तहत आरोप साबित नहीं
महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम की धारा 52 के तहत अनधिकृत विकास या निर्माण से संबंधित अपराध के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना आवश्यक था कि निर्माण संबंधित कानून के तहत स्वीकृत नहीं था या स्वीकृति की शर्तों के विरुद्ध किया गया था। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं हुआ कि दोनों आरोपियों ने MIDC की जमीन पर बिना अनुमति दो इमारतों का निर्माण कर धारा 52(1) के तहत अपराध किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, तीसरी अदालत, कल्याण के न्यायाधीश निलेश प्रभाकर वसाडे ने 7 अक्टूबर 2026 को दोनों आरोपियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत दोषमुक्त करने का आदेश दिया। अदालत ने उनके जमानत बांड रद्द करने और जमानतदारों को मुक्त करने का भी निर्देश दिया। साथ ही, धारा 437-A के अनुपालन के लिए जमानत प्रस्तुत करने को कहा।
