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महाराष्ट्र में सालभर सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट बोला- हर त्योहार पर लागू होगा आदेश

दिवाली समेत महाराष्ट्र में मनाए जाने वाले किसी भी त्योहार पर सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने के मामले में अब नियमों को सिर्फ गणपति उत्सव तक सीमित नहीं माना जाएगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 22 सितंबर का उसका आदेश पूरे महाराष्ट्र में सालभर लागू रहेगा। अदालत ने मुंबई में AQI के 425 तक पहुंचने का हवाला देते हुए पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण पर चिंता जताई और कहा कि त्योहारों के आधार पर नियमों में भेद नहीं किया जा सकता।

Sonali17 अक्टू. 2026, 05:34 PM IST
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महाराष्ट्र में सालभर सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट बोला- हर त्योहार पर लागू होगा आदेश

15 अक्टूबर 2026 को जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने अपने 22 सितंबर 2026 के आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे केवल गणपति उत्सव के लिए जारी आदेश समझना गलत है। यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में पूरे साल लागू रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस और नगर निकायों को यह गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए कि प्रतिबंध केवल गणपति उत्सव के दौरान ही प्रभावी है। यदि कुछ त्योहारों के दौरान नियम लागू हों और दूसरे त्योहारों में उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाए, तो यह व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि वर्षभर मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहारों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण की समस्या सामने आती है। ऐसे में सभी उत्सवों के दौरान लागू नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए।

मुंबई से ठाणे तक प्रदूषण पर हाईकोर्ट की चिंता

हाईकोर्ट ने मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली जैसे शहरों में मानसून के बाद छाने वाली धुंध और स्मॉग पर चिंता जताई। अदालत के मुताबिक, पहले से प्रदूषित हवा में पटाखों का धुआं और जहरीले तत्व मिलना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। खंडपीठ ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगमों और राज्य सरकार के लिए इस समस्या पर काबू पाना बड़ी चुनौती है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यह संकट मानवीय गतिविधियों से पैदा हुआ है और इसे रोकने के लिए नागरिकों में जागरूकता तथा जिम्मेदारी जरूरी है।

AQI 425 तक पहुंचने का हवाला, सांस लेना भी मुश्किल

अदालत ने मुंबई के वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index-AQI) का हवाला देते हुए कहा कि शहर के कुछ इलाकों में AQI 425 तक पहुंच गया था, जबकि दिवाली का उत्सव अभी शुरू भी नहीं हुआ था। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय माना। हाईकोर्ट ने कहा कि कई स्थानों पर लोगों के लिए स्वच्छ हवा में सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। प्रदूषण का असर नागरिकों की सामान्य दिनचर्या पर पड़ता है और लोग सुबह-शाम की सैर जैसी सामान्य गतिविधियों का भी आनंद नहीं ले पाते।

बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर असर

अदालत ने कहा कि पटाखों से पैदा होने वाला तेज और अनियंत्रित शोर निर्धारित डेसीबल सीमा का उल्लंघन कर सकता है। इसके अलावा, पटाखों से निकलने वाला धुआं, सूक्ष्म कण, जहरीली भारी धातुएं और हानिकारक गैसें वातावरण को दूषित करती हैं। इसका असर बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, बीमार लोगों और विद्यार्थियों सहित आम नागरिकों के स्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। अदालत ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरे लोगों के स्वास्थ्य और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार के प्रति भी संवेदनशील रहें।

त्योहार मनाने की आजादी, लेकिन नियमों की अनदेखी नहीं

हाईकोर्ट की टिप्पणी का स्पष्ट संदेश है कि त्योहारों के दौरान उत्सव मनाने के नाम पर सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और ध्वनि प्रदूषण फैलाने की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने अधिकारियों को आदेश की व्यापकता समझने और नियमों को सभी त्योहारों में समान रूप से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। 22 सितंबर के आदेश को स्पष्ट करते हुए अदालत ने दोहराया कि यह व्यवस्था पूरे महाराष्ट्र में सालभर प्रभावी रहेगी। हालांकि, आदेश को पटाखों पर हर परिस्थिति में पूर्ण प्रतिबंध के रूप में समझने के बजाय उसके विशिष्ट दायरे—सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और संबंधित ध्वनि, प्रकाश तथा प्रदूषण नियंत्रण—के संदर्भ में पढ़ना जरूरी है।