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भारत के लिए क्रिकेट खेलना है तो भारतीय नागरिकता लें, OCI कार्डधारकों से बॉम्बे हाईकोर्ट की दोटूक
भारत के लिए क्रिकेट खेलना है तो भारतीय नागरिकता लें—OCI खिलाड़ियों की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की। मामला BCCI के उस नियम से जुड़ा है, जिसके तहत भारतीय पासपोर्ट के बिना OCI कार्डधारक घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंटों में नहीं खेल सकते।

भारत में रहकर क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने और घरेलू टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति मांग रहे विदेशी पासपोर्ट धारक OCI (Overseas Citizen of India) खिलाड़ियों की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि यदि खिलाड़ी भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो उन्हें भारतीय नागरिकता स्वीकार करने पर विचार करना चाहिए। हालांकि, मामला केवल भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का नहीं, बल्कि BCCI के घरेलू टूर्नामेंटों में खेलने और IPL जैसे व्यावसायिक टूर्नामेंटों के लिए प्रदर्शन के आंकड़े जुटाने के अवसर का भी है।
यह मामला 12 युवा क्रिकेटरों की याचिका से जुड़ा है, जिनके पास OCI कार्ड हैं। याचिकाकर्ताओं ने BCCI के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत भारतीय क्रिकेट बोर्ड से संबद्ध टूर्नामेंटों में खेलने के लिए भारतीय पासपोर्ट अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे भारत में रहते हैं, यहीं पढ़ाई करते हैं और क्रिकेट की ट्रेनिंग लेते हैं। ऐसे में उन्हें घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं से बाहर रखना उनके खेल करियर और विकास के अवसरों को प्रभावित करता है। याचिकाकर्ताओं के वकील कुणाल चीमा ने, अधिवक्ता दत्ता माने की सहायता से, अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल भारतीय टीम में खेलने की अनुमति नहीं मांग रहे हैं। वे केवल घरेलू टूर्नामेंटों में भाग लेना चाहते हैं, ताकि अपने प्रदर्शन के आंकड़े तैयार कर सकें। ये आंकड़े IPL जैसे व्यावसायिक टूर्नामेंटों में अवसर पाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वकील ने यह भी कहा कि OCI कार्डधारकों पर ऐसी रोक 2023 से पहले नहीं थी।
'भारत में क्रिकेट प्रतिभाओं की कमी नहीं'
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि भारत में, खासकर क्रिकेट में, युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि क्या दूसरे विकसित देशों में भी अपने नागरिकों के अवसरों की जगह विदेशी नागरिकों को घरेलू प्रतियोगिताओं में मौका दिया जाता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि OCI कार्डधारक भारत में डॉक्टर और वकील जैसे पेशों में काम कर सकते हैं, तो उन्हें क्रिकेट खेलने से क्यों रोका जाए। इस पर अदालत ने सरकारी नौकरियों और सिविल सेवा परीक्षाओं में नागरिकता संबंधी पात्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट के मामले में भी नियमों और भारतीय नागरिकता की शर्त को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
BCCI ने कहा- क्रिकेट को आजीविका का अधिकार नहीं माना जा सकता
BCCI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. बीरेंद्र सराफ ने दलील दी कि OCI कार्डधारक भारतीय नागरिकता के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि बोर्ड खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करता है और घरेलू प्रतियोगिताओं के जरिए उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देता है। इसलिए बोर्ड के टूर्नामेंटों में भाग लेने के लिए भारतीय पासपोर्ट की शर्त उचित है। BCCI ने यह भी कहा कि OCI कार्डधारक स्कूल-कॉलेज स्तर की प्रतियोगिताओं, निजी क्रिकेट अकादमियों और अन्य ऐसे टूर्नामेंटों में खेल सकते हैं, जो BCCI के अधीन नहीं हैं। वे क्रिकेट को शौक के रूप में भी खेल सकते हैं, लेकिन इसे आजीविका का अधिकार बताकर बोर्ड पर उन्हें अपने टूर्नामेंटों में शामिल करने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि खेल भी बच्चों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को अपनी नागरिकता चुनने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अगली सुनवाई 25 नवंबर को
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह खिलाड़ियों के खेल और विकास के अधिकार के खिलाफ नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की मांग BCCI के अधीन प्रतियोगिताओं में भाग लेने की है, इसलिए इस पर नियमों और नागरिकता संबंधी प्रावधानों को ध्यान में रखकर विचार करना होगा। अदालत ने BCCI और केंद्र सरकार से उन OCI कार्डधारक खिलाड़ियों के भारतीय नागरिकता आवेदनों की स्थिति बताने को कहा है, जिन्होंने क्रिकेट खेलने के लिए नागरिकता बदलने की प्रक्रिया शुरू की है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।
