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कसारा घाट हत्या मामले में अभियोजन नाकाम, कल्याण कोर्ट ने चारों आरोपियों को किया बरी

कल्याण की अतिरिक्त सत्र अदालत ने हत्या और सबूत मिटाने के मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। मामला ठाणे के पुराने कसारा घाट में देवेंद्र उर्फ देवा बाबन प्रधान की हत्या कर शव जंगल में फेंकने के आरोप से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान साबित नहीं हुई और अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर सका।

Sonali17 अक्टू. 2026, 05:35 PM IST
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कसारा घाट हत्या मामले में अभियोजन नाकाम, कल्याण कोर्ट ने चारों आरोपियों को किया बरी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2 अगस्त 2024 को आरोपियों ने देवेंद्र प्रधान को ट्रांजिट कैंप बिल्डिंग के पीछे, टाटा पावर हाउस के पास पहाड़ी पर ले जाकर कथित तौर पर बांस और लकड़ी की लाठियों से हमला किया। आरोप था कि सिर, पेट, पीठ और पैरों पर चोट पहुंचाकर उनकी हत्या की गई। इसके बाद शव को पुराने कसारा घाट में मुंबई-नासिक रोड पर धुब्याची वाडी के सामने, विहिगांव के जंगल क्षेत्र में फेंक दिया गया, ताकि अपराध के सबूत मिटाए जा सकें। 7 अगस्त 2024 को अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने के बाद आकस्मिक मृत्यु की जांच शुरू हुई। पोस्टमार्टम में सिर की चोट और गला घोंटने को मौत का कारण बताया गया। इसके बाद कसारा पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और कथित तौर पर इस्तेमाल की गई लकड़ी की लाठियां, कपड़े, मोबाइल फोन, कार तथा पेन ड्राइव समेत अन्य सामग्री जब्त की।

CCTV फुटेज पर भी नहीं हुई पहचान

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए। हालांकि, मृतक की पत्नी पूजा प्रधान, भाई अनिल प्रधान और पिता बाबन प्रधान सहित कई गवाह अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं कर सके। मृतक की पत्नी ने बताया कि पुलिस ने उन्हें एक वीडियो दिखाया था, लेकिन फुटेज स्पष्ट नहीं होने के कारण वह उसमें अपने पति की पहचान नहीं कर सकीं। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि वीडियो में आरोपी उनके पति का शव ले जाते दिखाई दे रहे थे। मृतक के भाई और पिता ने भी वीडियो में आरोपियों तथा मृतक की पहचान करने से इनकार किया। अदालत ने पाया कि जिन गवाहों से वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान की अपेक्षा थी, उन्होंने अभियोजन पक्ष के दावे की पुष्टि नहीं की। इस कारण वीडियो फुटेज आरोपियों के खिलाफ विश्वसनीय सबूत के रूप में साबित नहीं हो सकी।

लाठियां बरामद होने से अपराध साबित नहीं हुआ

अदालत के सामने आरोपियों के खिलाफ मुख्य साक्ष्य अनिकेत कांबले की कथित निशानदेही पर चार से पांच लकड़ी की लाठियों की बरामदगी था। हालांकि, गवाह ने स्वीकार किया कि लाठियों पर कोई विशेष पहचान चिह्न नहीं था और पुलिस ने उनका माप भी दर्ज नहीं किया था। अदालत ने लगभग दो साल बाद उन्हीं लाठियों की पहचान किए जाने को भरोसेमंद नहीं माना। अदालत ने कहा कि केवल बरामदगी के आधार पर हत्या का अपराध साबित नहीं किया जा सकता। परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) के मामलों में सभी परिस्थितियों की कड़ी पूरी होनी चाहिए और सबूतों से आरोपियों का अपराध से विश्वसनीय संबंध स्थापित होना चाहिए। इस मामले में अभियोजन पक्ष ऐसा करने में विफल रहा।

अदालत ने चारों आरोपियों को किया बरी

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपियों को देवेंद्र प्रधान की हत्या करने या शव फेंककर सबूत मिटाने से जोड़ने वाला पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। इसके बाद चारों आरोपियों को BNS की धारा 103(1) के तहत हत्या, धारा 238 के तहत सबूत मिटाने और धारा 3(5) के तहत समान आशय से किए गए अपराध के आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत ने जब्त किए गए कपड़ों, लाठियों और पेन ड्राइव को अपील की अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने का निर्देश दिया। गवाह से जब्त Redmi मोबाइल फोन को निर्धारित सत्यापन के बाद लौटाने का आदेश भी दिया गया। साथ ही, चारों आरोपियों को उच्च अदालत से अपील या याचिका के संबंध में नोटिस जारी होने पर उपस्थित होने के लिए छह महीने तक प्रभावी रहने वाला 15,000 रुपये का व्यक्तिगत बांड (P.R. Bond) भरने का निर्देश दिया गया।