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कल्याण में दुष्कर्म केस में महिला की गवाही से पलटा मामला, शादी और सहमति से संबंधों की बात पर आरोपी बरी

कल्याण की विशेष FTSC अदालत ने शादी का झांसा देकर बार-बार दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोप में गणेश जगन्नाथ इंगले को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान महिला ने जिरह में स्वीकार किया कि वह बालिग थी और दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।

Sonali17 अक्टू. 2026, 05:35 PM IST
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कल्याण में दुष्कर्म केस में महिला की गवाही से पलटा मामला, शादी और सहमति से संबंधों की बात पर आरोपी बरी

यह मामला महात्मा फुले पुलिस स्टेशन में दर्ज वर्ष 2018 के अपराध क्रमांक 49/2018 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, महिला की अक्टूबर 2016 में आरोपी गणेश इंगले से सोशल मीडिया के जरिए पहचान हुई थी। बाद में दोनों के बीच दोस्ती हो गई। आरोप था कि आरोपी ने महिला से शादी करने का वादा किया और उसे अलग-अलग होटलों तथा लॉज में ले जाकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के अनुसार, इन संबंधों के कारण महिला गर्भवती हो गई। जब वह करीब चार महीने की गर्भवती थी, तब आरोपी ने कथित तौर पर शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(1), 376(2)(n) और 417 के तहत आरोप लगाए। इनमें दुष्कर्म, बार-बार दुष्कर्म और धोखाधड़ी से संबंधित आरोप शामिल थे।

जिरह में महिला ने क्या कहा?

मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता महिला ही अभियोजन पक्ष की मुख्य गवाह थी। शुरुआत में उसने अभियोजन के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील द्वारा की गई जिरह में उसने अपने पहले के बयान से अलग बातें स्वीकार कीं। महिला ने अदालत में बताया कि आरोपी से दोस्ती के समय वह करीब 23 वर्ष की थी और बालिग थी। उसने स्वीकार किया कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध उसकी सहमति से बने थे। उसने यह भी कहा कि आरोपी ने दबाव, प्रलोभन, धमकी या किसी धोखे के जरिए उसके साथ संबंध नहीं बनाए थे। महिला ने शिकायत दर्ज कराने की वजह गलतफहमी बताई। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, महिला ने यह भी स्वीकार किया कि बाद में दोनों ने रीति-रिवाजों के अनुसार शादी कर ली और उनका एक बेटा है। उसने अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बताया तथा कहा कि वर्तमान में उसे आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।

अदालत ने क्यों किया बरी?

विशेष न्यायाधीश एवं जिला न्यायाधीश-6, कल्याण, लक्ष्मीकांत ए. बिडवाई ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि शिकायतकर्ता की जिरह में सामने आए तथ्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि संबंधित समय पर महिला बालिग थी और उसने शारीरिक संबंधों को सहमति से बनाया जाना स्वीकार किया। साथ ही, उसने दबाव, धमकी या धोखे से संबंध बनाए जाने की बात से इनकार किया। बाद में दोनों के विवाह और वर्तमान वैवाहिक जीवन के संबंध में दिए गए बयान भी अदालत के सामने थे। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, बार-बार दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोप प्रमाणित नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 235(1) के तहत गणेश जगन्नाथ इंगले को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने आरोपी के जमानत बांड रद्द कर दिए और जमानतदारों को मुक्त कर दिया। साथ ही, अपील की स्थिति में उच्च अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए आरोपी को 25,000 रुपये का व्यक्तिगत बांड और समान राशि का जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।