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मुंबई में CEC विरोध प्रदर्शन के दौरान अवैध हिरासत का आरोप, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

मुंबई में 10 और 11 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लेने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। कम से कम सात लोगों ने हलफनामे देकर दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ ने घरों से उठाए जाने का आरोप लगाया।

Sonali19 अक्टू. 2026, 05:57 PM IST
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मुंबई में CEC विरोध प्रदर्शन के दौरान अवैध हिरासत का आरोप, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

मुंबई:

 मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner-CEC) के विरोध में मुंबई में 10 और 11 अक्टूबर 2026 को हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित अवैध हिरासत का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कम से कम सात लोगों के हलफनामे पेश किए गए। इन लोगों ने आरोप लगाया कि वे विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, फिर भी मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। कुछ हलफनामों में दावा किया गया कि संबंधित लोगों को उनके घरों से उठाया गया था।

सरकार का दावा- अगस्त क्रांति मैदान पर किसी को हिरासत में नहीं लिया

महाराष्ट्र के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन के संबंध में किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। उनके अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति नाना चौक के पास रास्ता रोक दिया था। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को वहां से हटाया। महाधिवक्ता ने अदालत में कहा कि अगस्त क्रांति मैदान वाले स्थान पर किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हलफनामों में लगाए गए आरोपों पर अदालत ने राज्य सरकार से औपचारिक जवाब मांगा।

वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने महाराष्ट्र सरकार को इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्तियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और वे शांतिप्रिय नागरिक होने चाहिए। यदि किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास है, तो वह अलग मामला होगा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।

‘अवैध हिरासत के मामले सामने आए तो अदालत कार्रवाई करेगी’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिबंध बहुत अधिक हैं, लेकिन यदि अवैध हिरासत के मामले सामने आते हैं, तो अदालत उन पर ध्यान देगी। मामले में अब महाराष्ट्र सरकार के हलफनामे के जरिए यह स्पष्ट होना है कि पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की थी और क्या किसी को कानून के विपरीत हिरासत में लिया गया था। फिलहाल, अदालत ने कथित अवैध हिरासत के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले में सरकार का जवाब और उसके बाद होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।