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हत्या के मामले में उम्रकैद पाए नंदलाल राय की सजा पर रोक, 2027 में BJP या निर्दलीय चुनाव लड़ने की इच्छा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2017 के हत्याकांड में दोषी ठहराए गए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगा दी है। राय ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निर्दलीय या संभव होने पर BJP के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। अदालत ने कहा कि आम आदमी की आजीविका का अधिकार किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है।

Sonali19 अक्टू. 2026, 05:56 PM IST
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हत्या के मामले में उम्रकैद पाए नंदलाल राय की सजा पर रोक, 2027 में BJP या निर्दलीय चुनाव लड़ने की इच्छा

प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2017 के एक हत्याकांड में दोषी ठहराए गए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगा दी है। राय ने अदालत में कहा था कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने उनकी आपराधिक अपील पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने टिप्पणी की कि एक आम व्यक्ति की आजीविका का अधिकार किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक जीवित रहने और अपना पक्ष रखने के लिए अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाना उचित है।

2025 में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे राय

नंदलाल राय को वर्ष 2025 में वर्ष 2017 के प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था। मृतक प्रमोद कुमार निगम राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े सक्रिय सदस्य बताए गए हैं। अभियोजन के अनुसार, राय पर मामूली विवाद को लेकर उनकी हत्या करने का आरोप था। रिपोर्ट के मुताबिक, राय का संबंध गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी से भी बताया गया। हालांकि, अपीलकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि राय का नाम प्रारंभिक FIR में दर्ज नहीं था और घटना में उनकी कथित संलिप्तता का खुलासा FIR दर्ज होने के लगभग 17 दिन बाद हुआ।

बचाव पक्ष ने गवाहों और हथियार की बरामदगी पर उठाए सवाल

अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्हें संदेह और अनुमान के आधार पर मामले में फंसाया गया। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि दोषसिद्धि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अधूरी कड़ी और संदिग्ध प्रत्यक्षदर्शी गवाही पर आधारित थी। हत्या में इस्तेमाल कथित पिस्तौल की बरामदगी पर भी सवाल उठाए गए। राय के वकील ने यह भी बताया कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं और दोषी ठहराए जाने से पहले BJP के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने की इच्छा जताई। राज्य सरकार ने जमानत अर्जी का विरोध किया। हालांकि, अदालत के आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता अपीलकर्ता के वकील की दलीलों का खंडन नहीं कर सके।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अफजल अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 389(1) के तहत दोषसिद्धि पर रोक लगाने के आवेदन पर मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस बात पर भी विचार किया गया था कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से चुनाव लड़ने का अवसर खत्म होने जैसे गंभीर या अपूरणीय परिणाम हो सकते हैं।

जमानत के साथ संपत्ति को लेकर शर्त

हाईकोर्ट ने नंदलाल राय को संबंधित अदालत की संतुष्टि के अनुसार व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत की अनुमति के बिना उन्हें अपने नाम की किसी अचल संपत्ति को हस्तांतरित करने, बेचने या उस पर कोई भार बनाने से रोक दिया गया। यह आदेश अपील लंबित रहने के दौरान दोषसिद्धि और सजा पर रोक से संबंधित है। इसे हत्याकांड में अंतिम बरी होने का फैसला नहीं माना जा सकता। अपील पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।