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टाउनशिप का ठेका लेने के लिए सीवरेज-ड्रेनेज का अनुभव जरूरी, हाईकोर्ट की दोटूक: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क बनाने और उसके रखरखाव का अनुभव टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं है। आगरा विकास प्राधिकरण के टेंडर विवाद में अदालत ने माना कि टेंडर रद्द करने के आदेश में कारणों की कमी थी, लेकिन मूल रिकॉर्ड में पर्याप्त आधार मिलने पर ठेकेदार की याचिका खारिज कर दी।

Sonali19 अक्टू. 2026, 05:49 PM IST
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टाउनशिप का ठेका लेने के लिए सीवरेज-ड्रेनेज का अनुभव जरूरी, हाईकोर्ट की दोटूक: हाईकोर्ट

प्रयागराज: 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक टेंडर (Public Tender) से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि सड़क बनाने और उसका रखरखाव करने का अनुभव किसी टाउनशिप में आंतरिक विकास कार्यों (Internal Development Works) के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि टेंडर में निर्धारित अनुभव की शर्त अनिवार्य है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने टेंडर रद्द करने के आदेश में कारणों की कमी को गलत माना, लेकिन मूल रिकॉर्ड के आधार पर पूरी निविदा प्रक्रिया रद्द करने को उचित ठहराया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला M/s Balaji Construction बनाम State of U.P. एवं अन्य मामले में सुनाया। अदालत ने निर्माण कंपनी की याचिका खारिज कर दी।

आगरा विकास प्राधिकरण के दो टेंडरों को लेकर विवाद

मामला आगरा विकास प्राधिकरण (Agra Development Authority) की दो टाउनशिप- सिंधुपुरम (Township-1) और यमुनापुरम (Township-4) में आंतरिक विकास कार्यों के लिए जारी ई-टेंडर से जुड़ा था। याचिकाकर्ता निर्माण कंपनी ने दोनों परियोजनाओं के लिए बोली लगाई थी। 23 अप्रैल 2026 को तकनीकी बोलियां खोली गईं, जिसमें कंपनी को तकनीकी रूप से योग्य दिखाया गया। इसके दो दिन बाद, 25 अप्रैल को प्राधिकरण ने दोनों टेंडर अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए रद्द कर दिए और उसी दिन नए टेंडर जारी कर दिए। कंपनी ने आरोप लगाया कि वित्तीय बोलियां नियमानुसार खोले जाने से पहले ही देख ली गई थीं, ताकि पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सके। बाद में दो अन्य पक्षों को आशय पत्र (Letter of Intent) जारी किए गए।

सड़क निर्माण का अनुभव टाउनशिप विकास के बराबर नहीं

प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि कंपनी का नाम गलती से तकनीकी रूप से योग्य दिखाया गया था। उसके अनुसार, कंपनी के पास टेंडर में मांगे गए समान प्रकृति के कार्यों का आवश्यक अनुभव नहीं था। अदालत ने मूल रिकॉर्ड की जांच में पाया कि कंपनी द्वारा पेश अनुभव प्रमाणपत्र हाथरस-जलेसर सड़क को चौड़ा करने और मजबूत बनाने से संबंधित था। इसमें सीवरेज पाइप बिछाने या ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने का अनुभव दर्ज नहीं था। खंडपीठ ने कहा कि सड़क निर्माण और रखरखाव के अनुभव को टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के बराबर मानने से पात्रता की शर्त का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। टाउनशिप के विकास में विशेष प्रकार के कार्यों की जरूरत होती है, जिन्हें केवल सड़क निर्माण के अनुभव के आधार पर समान नहीं माना जा सकता।

टेंडर रद्द करने का आदेश भी कारणों के बिना था

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि टेंडर रद्द करने के आदेश में ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का उल्लेख तो था, लेकिन इसके समर्थन में कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया था। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी के पास टेंडर रद्द करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि वह बिना कारण बताए ऐसा कर सकता है। अदालत ने Mohinder Singh Gill बनाम Chief Election Commissioner मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदेश में अनुपस्थित कारणों की भरपाई बाद में दाखिल हलफनामे के जरिए नहीं की जा सकती। इसके बावजूद, मूल रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी का अनुभव निर्धारित कार्यों की प्रकृति और मूल्य के अनुरूप नहीं था। अदालत ने माना कि दोनों टाउनशिप की पूरी निविदा प्रक्रिया रद्द करने का पर्याप्त आधार मौजूद था। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि संबंधित कार्यकारी अभियंता को बाद में निलंबित कर दिया गया था।

ठेकेदार की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने कहा कि संभावित आवंटियों को प्लॉट देने से पहले टाउनशिप में जरूरी विकास कार्य पूरे करना महत्वपूर्ण है। अनुभव की अनिवार्य शर्त में ढील देने से वहां रहने वालों को घटिया सुविधाएं मिलने का जोखिम हो सकता है। कंपनी ने अपनी जमानत राशि (Earnest Money) जब्त करने के प्रस्ताव वाले कारण बताओ नोटिस को भी चुनौती दी थी। अदालत को इसमें दुर्भावना, पहले से तय निर्णय या अधिकार क्षेत्र की स्पष्ट कमी का पर्याप्त आधार नहीं मिला। प्राधिकरण को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता देते हुए अदालत ने याचिका खारिज कर दी।