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कोमा में मरीज के खाते से पैसे निकालने में कानूनी अड़चनें, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र-RBI से पूछा समाधान

कोमा में पड़े मरीज के बैंक खाते में जमा रकम होने के बावजूद परिवार को उसके इस्तेमाल में कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। इलाज का खर्च और घर की जिम्मेदारियों के बीच फंसे ऐसे परिजनों की परेशानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार और RBI से पूछा है कि इस समस्या के समाधान के लिए कानून या दिशा-निर्देश बनाने की कोई व्यवस्था है या नहीं।

Sonali20 अक्टू. 2026, 06:19 PM IST
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कोमा में मरीज के खाते से पैसे निकालने में कानूनी अड़चनें, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र-RBI से पूछा समाधान

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी परवीन जहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। मामले में बैंक खाताधारक कोमा की स्थिति में था, लेकिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने चिंता जताई कि जब कोई व्यक्ति कोमा में चला जाता है, तो उसके आश्रितों के सामने मरीज के अस्पताल का खर्च उठाने और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। इसके बावजूद, बैंक खाते में जमा राशि होने पर भी उसे इस्तेमाल करने के लिए परिजनों के पास आवश्यक कानूनी अधिकार या प्रक्रिया नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मरीज के आश्रित असहाय हो जाते हैं। इसलिए इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।

केंद्र सरकार और RBI से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या कोमा या लंबे समय तक अचेत अवस्था में रहने वाले मरीजों के बैंक खातों से उनके आश्रितों को पैसा उपलब्ध कराने के लिए कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है या दिशा-निर्देश बनाए गए हैं। अदालत ने कहा कि सक्षम विधायिका कानून बना सकती है या RBI राष्ट्रीयकृत बैंकों और उनसे संबंधित बैंकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसका उद्देश्य ऐसी विशेष परिस्थितियों में बैंक खाते में जमा राशि मरीज के आश्रितों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तय करना होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक को उसके बैंकिंग विनियमन विभाग के कार्यकारी निदेशक के माध्यम से और केंद्र सरकार को वित्त मंत्रालय के सचिव के माध्यम से मामले में पक्षकार बनाया जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार से भी ठोस समाधान पेश करने को कहा

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी इस समस्या के समाधान पर विचार करने को कहा है। इसके लिए केरल हाईकोर्ट के Shobha Gopalakrishnan बनाम State of Kerala मामले में जारी दिशा-निर्देशों पर विचार करने का सुझाव दिया गया। इन दिशा-निर्देशों का उल्लेख इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व फैसले Uma Mittal and Others बनाम Union of India and Others में भी किया गया था। इससे पहले Uma Mittal मामले में केंद्र सरकार को ऐसी स्थिति में रहने वाले व्यक्ति के लिए अभिभावक नियुक्त करने से संबंधित उचित कानून बनाने का निर्देश दिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से इस मामले में ठोस और प्रभावी समाधान पेश करने को कहा है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि मुख्य सचिव अगली सुनवाई पर कोई ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।

वहीं, RBI द्वारा हलफनामा दाखिल नहीं करने की स्थिति में अदालत ने संबंधित अधिकारियों को तलब करने की चेतावनी भी दी है।

मृत खाताधारक की रकम के लिए उत्तराधिकार का रास्ता खुला

मौजूदा मामले में खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को बैंक खाते में जमा रकम प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकार (Succession) से संबंधित आवेदन करने की छूट दी है। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 6 नवंबर को सूचीबद्ध किया है। यह मामला ऐसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके परिवार का कोई सदस्य कोमा या अचेत अवस्था में होने के कारण अपने बैंक खाते का संचालन नहीं कर सकता। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि ऐसी आपात परिस्थितियों में मरीज के इलाज और परिवार की जरूरतों के लिए बैंक में जमा उसकी राशि तक कानूनी रूप से पहुंच कैसे सुनिश्चित की जाए।