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ED की फ्लैट जब्ती से पूरी हाउसिंग सोसायटी का पुनर्विकास अटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने NOC देने का निर्देश दिया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से एक फ्लैट जब्त किए जाने के कारण 44 साल पुरानी इमारत का पुनर्विकास अटक गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाउसिंग सोसायटी को राहत देते हुए ED को छह सप्ताह के भीतर अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनर्विकास के बावजूद जब्त किए गए फ्लैट पर ED के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

Sonali22 अक्टू. 2026, 03:14 PM IST
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ED की फ्लैट जब्ती से पूरी हाउसिंग सोसायटी का पुनर्विकास अटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने NOC देने का निर्देश दिया

यह मामला मुंबई की अंतराल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी (Antaral Co-operative Housing Society) का है। इस सोसायटी की इमारत करीब 44 साल पुरानी है। इसमें कुल 10 फ्लैट और 12 सदस्य हैं। इमारत की जर्जर हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण सोसायटी पुनर्विकास कराना चाहती थी, लेकिन एक फ्लैट की जब्ती  के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने वर्ष 2013 में इमारत के फ्लैट नंबर 4 को कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामले में कुर्क किया था। एजेंसी का कहना था कि संबंधित फ्लैट कथित तौर पर आर्थिक अपराध से प्राप्त धन से खरीदा गया था। बाद में धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act—PMLA) के तहत जब्ती  की कार्रवाई बरकरार रही। मामला रांची की विशेष PMLA अदालत में लंबित है। सोसायटी ने पुनर्विकास के लिए ED से NOC मांगी थी, लेकिन सितंबर 2025 में एजेंसी ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सोसायटी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।

इमारत की हालत और बुजुर्ग निवासियों की परेशानी

सोसायटी ने अदालत को बताया कि इमारत की हालत खराब है और वह रहने के लिहाज से सुरक्षित नहीं रह गई है। इमारत में आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं का अभाव है और लिफ्ट भी नहीं है। यहां रहने वाले कई लोग वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनके लिए मौजूदा परिस्थितियों में रहना मुश्किल हो रहा है। सोसायटी का तर्क था कि वह ED की ओर से की गई जब्ती  को चुनौती नहीं दे रही है। उसकी मांग केवल इतनी थी कि फ्लैट पर एजेंसी के अधिकार सुरक्षित रखते हुए बाकी इमारत का पुनर्विकास करने की अनुमति दी जाए।

नए फ्लैट पर भी ED का अधिकार रहेगा

सोसायटी ने अदालत के सामने सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा। इसके तहत जब्ती किए गए पुराने फ्लैट के बदले पुनर्विकास के बाद मिलने वाला नया फ्लैट भी ED की कुर्की के अधीन रहेगा और परियोजना पूरी होने पर उसे एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा, संबंधित फ्लैट से जुड़े सभी आर्थिक लाभ, जैसे पुनर्विकास के दौरान मिलने वाला किराया (Transit Rent), मुआवजा और अन्य भुगतान, ED की ओर से बताए गए अलग खाते में जमा किए जाएंगे। अदालत ने सोसायटी की इन प्रतिबद्धताओं को ED के हितों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त माना। निर्देश दिया गया कि पुनर्विकास से जुड़े विकास समझौते और स्थायी वैकल्पिक आवास समझौते तैयार करते समय ED को भी शामिल किया जाए। कुर्क किए गए फ्लैट से संबंधित दस्तावेज एजेंसी की जांच के लिए प्रस्तुत किए जाएं।

बैंक गारंटी की मांग भी खारिज

ED के हितों की सुरक्षा के लिए बैंक गारंटी की मांग पर अदालत ने इसे अनावश्यक आर्थिक बोझ माना। अदालत के अनुसार, जब विकासक (Developer) और पुनर्विकास की अंतिम शर्तें अभी तय होनी हैं, तब सोसायटी पर बैंक गारंटी की अतिरिक्त जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। केवल एक फ्लैट कुर्क होने के कारण पूरी सोसायटी पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डालना भी उचित नहीं माना गया।

ED को छह सप्ताह में NOC देने का निर्देश

न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष एस. चव्हाण की खंडपीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को सोसायटी के पक्ष में आदेश दिया। अदालत ने ED को निर्देश दिया कि सोसायटी की ओर से दिए गए आश्वासनों और शर्तों के अधीन छह सप्ताह के भीतर NOC जारी की जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित आदेश और सोसायटी का हलफनामा रांची की विशेष PMLA अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य जब्ती  की गई संपत्ति पर ED के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए पूरी हाउसिंग सोसायटी के पुनर्विकास का रास्ता खोलना है। हालांकि, NOC मिलने का अर्थ फ्लैट की कुर्की समाप्त होना नहीं है; नए फ्लैट और उससे जुड़े आर्थिक लाभों पर एजेंसी के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।