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दुर्गा विसर्जन में पटाखों पर बैन की धज्जियां, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस-नगर निगम को लगाई फटकार
दुर्गा विसर्जन जुलूस में पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध के बावजूद उल्लंघन जारी रहने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस और नगर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों और अस्पतालों, स्कूलों जैसे शांत क्षेत्रों के आसपास पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध के स्पष्ट आदेश हैं, फिर भी अधिकारी उनका पालन कराने में नाकाम दिख रहे हैं। हाईकोर्ट ने आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उल्लंघन रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया।

मुंबई:
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सालभर लागू होगा। 21 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने दुर्गा विसर्जन जुलूसों के दौरान आदेशों के उल्लंघन पर चिंता जताई।
‘सरकारी मशीनरी बेहद धीमी’, हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि अदालत के आदेशों का पालन कराने में सरकारी मशीनरी की गति बेहद धीमी दिखाई दे रही है। कोर्ट के अनुसार, आम लोगों को प्रतिबंध की जानकारी देने के लिए जरूरी शुरुआती कदम भी समय पर नहीं उठाए गए। अदालत ने कहा कि नगर निगम और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिलकर समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक करना था। लोगों को बताया जाना था कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं है। साथ ही, पटाखों से निकलने वाले धुएं, जहरीले पदार्थों और तेज आवाज के नुकसान के बारे में भी जानकारी दी जानी थी।
धार्मिक जुलूसों में भी नियमों का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक जुलूसों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण से जुड़े निर्देशों का नियमित रूप से उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने जुलूसों में संगीत प्रणालियों के इस्तेमाल के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित ध्वनि-सीमा का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। पीठ ने यह भी कहा कि मुंबई के पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों को 15 अक्टूबर के आदेशों की जानकारी तक नहीं होने की स्थिति सामने आई है। अदालत ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि सभी पुलिस अधिकारियों को आदेशों से अवगत कराया जाए, ताकि वे उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकें।
नागरिकों के अधिकार प्रभावित होने पर जवाबदेही तय होगी
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस की लापरवाही से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत नागरिकों के अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आदेशों के पालन में चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे पहले 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर त्योहारों के दौरान पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध पूरे महाराष्ट्र में लागू रहेगा। अस्पतालों, स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों के आसपास के शांत क्षेत्रों में भी पटाखे फोड़ने पर रोक रहेगी।
26 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
यह मामला ‘इन री: नॉइज एंड एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन बनाम महाराष्ट्र राज्य’ शीर्षक से चल रही स्वतः संज्ञान जनहित याचिका से जुड़ा है। अदालत ने पुलिस और नागरिक प्रशासन को आदेशों के पालन के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। मामले पर आगे विचार के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है। हाईकोर्ट की सख्ती का मुख्य संदेश स्पष्ट है: त्योहार मनाने के नाम पर सार्वजनिक सुरक्षा, शांत वातावरण और दूसरे नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। प्रतिबंध का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
