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बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों को फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाने में मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी बनवाकर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस को ऐसे लोगों की भूमिका की गहन जांच करने और अपराध में संलिप्तता सामने आने पर मुकदमा चलाने को कहा है। मामला नवी मुंबई के कामोठे इलाके में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे छह बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने UIDAI को एक आरोपी के आधार कार्ड से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

Sonali23 अक्टू. 2026, 02:40 PM IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों को फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाने में मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया

यह मामला महाराष्ट्र पुलिस की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें UIDAI से बकार हसन शेख (Bakaar Hasan Shaikh) के आधार कार्ड से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। पुलिस के अनुसार, शेख कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक है, जिसने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के बाद आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज हासिल कर लिए थे। मामले की सुनवाई 22 अक्टूबर को न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने की। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, शेख समेत पांच अन्य बांग्लादेशी नागरिक कथित तौर पर नवी मुंबई के कामोठे इलाके में भारतीय नागरिक बनकर रह रहे थे। आरोप है कि इन सभी ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए थे। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उन्होंने कथित तौर पर इन दस्तावेजों को पेश कर खुद को भारतीय नागरिक बताया। इससे जांच एजेंसी के सामने उनकी पहचान और दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल का सवाल खड़ा हुआ।

दस्तावेज बनवाने में मदद करने वालों के नाम आए सामने

सुनवाई के दौरान अदालत ने गौर किया कि आरोपियों ने कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम बताए, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करने में मदद की थी। इनमें मोहम्मद अलाउद्दीन उर्फ मास्टर उस्मान अंसारी, प्रवीण आनंद पाटिल, अजय भीमराव सर्वे और विशाल जनार्दन शेडगे के नाम शामिल हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच केवल कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें फर्जी पहचान पत्र बनवाने और भारत में बसने में मदद करने वालों की भूमिका की भी विस्तार से जांच होनी चाहिए।

'दोषी पाए जाने पर कानून के तहत चलाएं मुकदमा'

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन कार्ड, वोटर आईडी और आधार कार्ड हासिल करके खुद को भारतीय नागरिक बताना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को मामले की शीघ्र जांच करने और सभी पहलुओं की पड़ताल करने को कहा। अदालत के निर्देश के मुताबिक, यदि जांच में किसी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के प्रावधानों के अनुसार मुकदमा चलाया जाए और जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।

UIDAI को पुलिस की मदद करने का आदेश

हाईकोर्ट ने UIDAI को निर्देश दिया कि वह बकार हसन शेख के आधार कार्ड से संबंधित पुलिस द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराए। इससे जांच एजेंसी को दस्तावेजों की जांच और मामले की आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकेगी। राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक प्राजक्ता शिंदे ने पक्ष रखा, जबकि UIDAI की ओर से अधिवक्ता सुप्रिया काक पेश हुईं। अदालत के निर्देश का मुख्य संदेश यह है कि यदि विदेशी नागरिकों को फर्जी पहचान दिलाने में मदद करने वालों की भूमिका साबित होती है, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, जिन व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, उनकी आपराधिक संलिप्तता जांच में साबित होना अभी बाकी है।